काशी विद्यापीठ में विशेष व्याख्यान आयोजित:सामाजिक सरोकारों पर अकादमिक विमर्श, दलित साहित्य लेखन को प्रोत्साहन
वाराणसी में सोमवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग द्वारा "दलित सौंदर्यशास्त्र और दलित आत्मकथाओं के अंतर्संबंध" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दलित साहित्य, दलित सौंदर्यशास्त्र एवं आत्मकथात्मक लेखन के सामाजिक सरोकारों पर अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करना था। मुख्य वक्ता प्रो. एच. एस. रंधावा, डी.ए.वी. पी.जी. कॉलेज, देहरादून ने दलित सौंदर्यशास्त्र और दलित आत्मकथाओं के पारस्परिक संबंध पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दलित साहित्य केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक अनुभवों, संघर्षों, अस्मिता और प्रतिरोध की सशक्त आवाज है। प्रो. रंधावा ने कहा कि दलित आत्मकथाएं व्यक्तिगत जीवनानुभवों, जातिगत भेदभाव, सामाजिक उत्पीड़न और संघर्षों को व्यापक सामाजिक संदर्भ प्रदान करती हैं। ये रचनाएं सामाजिक संवेदना और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की चेतना को मजबूत करती हैं। कार्यक्रम में डॉ. नीरज धनकड़, विभागाध्यक्ष, और डॉ. नवरत्न सिंह ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। व्याख्यान विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक रहा।
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