कंगना रनौत के ‘गटर जेनरेशन’ बयान पर रिवीजन:आगरा एमपी-एमएलए कोर्ट ने खारिज कर दिया था वाद, अब 14 अक्टूबर को होगी अगली तारीख
भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के छात्र-छात्राओं को ‘गटर जेनरेशन’ कहने के मामले में कानूनी लड़ाई आगे बढ़ गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के उस आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी है, जिसमें उनका परिवाद खारिज कर दिया गया था। शुक्रवार को जिला जज संजय कुमार मलिक की अदालत में रिवीजन पर सुनवाई हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता राधाकृष्ण गुप्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। निचली अदालत के फैसले को दी चुनौती रमाशंकर शर्मा ने 31 जुलाई 2026 को स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए में कंगना रनौत के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था। आरोप था कि पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को लेकर कंगना की टिप्पणी अपमानजनक थी। हालांकि, स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह ने 3 सितंबर 2026 को परिवाद खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि परिवादी न तो घटना में पीड़ित हैं और न ही व्यथित। इसके बाद अधिवक्ता ने जिला जज की अदालत में रिवीजन दाखिल कर इस फैसले को चुनौती दी है। पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर टिप्पणी का आरोप परिवाद के अनुसार, देश में नीट और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक होने के विरोध में छात्र-छात्राओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। इसी संदर्भ में 27 जुलाई 2026 को कंगना रनौत ने प्रदर्शनकारियों के लिए ‘गटर जेनरेशन’ शब्द का इस्तेमाल किया था। परिवादी का आरोप है कि इस टिप्पणी से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ उनके अभिभावकों का भी अपमान हुआ। रमाशंकर शर्मा ने अपने परिवाद में कहा था कि वह स्वयं एक छात्र के पिता हैं। उन्होंने अपने पुत्र का शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी परिवाद के साथ लगाया था। उनका कहना था कि छात्रों के भविष्य और पेपर लीक के मुद्दे से प्रभावित परिवारों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मामले पर सुनवाई होनी चाहिए। अब जवाब के बाद आगे बढ़ेगी सुनवाई जिला जज की अदालत में शुक्रवार को रिवीजन की प्रति जिला शासकीय अधिवक्ता को उपलब्ध कराई गई। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने 14 अक्टूबर की तारीख नियत कर दी। अब अगली सुनवाई में मामले पर आगे की कार्यवाही होगी। इस मामले में परिवादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, रामदत्त दिवाकर, राजवीर सिंह, प्रीति सिंह, सुमंत चतुर्वेदी, पंकज बघेल और बीएस फौजदार सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
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