कुशीनगर में बाढ़ से कई गांव डूबे, लोग हाईवे पर:कुशीनगर में नारायणी नदी उफनी, गांवों में घुटनों से कमर तक पानी
कुशीनगर में मूसलाधार बारिश और नेपाल से लगातार छोड़े जा रहे पानी के बाद बड़ी गंडक यानी नारायणी नदी उफान पर है। खड्डा से लेकर तमकुहीराज तहसील क्षेत्र तक नदी का पानी निचले इलाकों में फैल गया है। सालिगपुर, महादेवा, मारिचहवा, शिवपुर, नारायणपुर और गोपालपुर समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। तीन दिन पहले तक जिन घरों में परिवार अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे थे, अब उनमें पानी भर गया है। कई परिवार गृहस्थी का सामान और पशुओं को लेकर नेशनल हाईवे के किनारे पहुंच गए हैं। पंचायत भवन और जूनियर हाईस्कूल तक पानी में डूब गए हैं। प्रशासन की मुनादी के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण घरों को बंद कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। घर छोड़े, हाईवे किनारे सामान लेकर डेरा सालिगपुर, महादेवा, नरकहवा समेत करीब आधा दर्जन गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई घरों में घुटनों से लेकर कमर तक पानी पहुंच चुका है। ऐसे में ग्रामीण जरूरी सामान, बच्चों और पशुओं को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल रहे हैं। कई परिवार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ऊंचे स्थानों पर डेरा डाले हुए हैं। जिन घरों में लोग अब भी रह रहे हैं, वहां बच्चों को पानी से बचाने के लिए चारपाई पर बैठाकर रखने की व्यवस्था की गई है। ग्रामीणों के लिए इस समय नेशनल हाईवे ही सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है। धान-गन्ने की फसल डूबी, सांपों का भी खतरा बाढ़ का पानी खेतों में भरने से पक चुकी धान और गन्ने की फसलें डूब गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा तो फसलें सड़कर बर्बाद हो सकती हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है। वहीं बाढ़ के पानी के साथ जहरीले सांपों के बहकर आने का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता छोटे बच्चों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर है। गांवों में हैंडपंप और जलकल विभाग की टोटियां भी पानी से प्रभावित हैं, जिससे पीने के पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ गया है। राहत शिविरों में खाना-पानी और हेल्थ कैंप प्रशासन की ओर से नेशनल हाईवे किनारे अस्थायी बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं। यहां प्रभावित परिवारों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है। बीमारियों से बचाव के लिए हेल्थ कैंप भी लगाए गए हैं। हालांकि कुछ ग्रामीण घरों में राशन, जरूरी सामान और पशुओं की सुरक्षा के लिए अब भी पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। रविवार को नवागत जिलाधिकारी संजय चौहान ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया और राहत कार्यों को व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। हर साल बाढ़, ग्रामीण मांग रहे स्थायी समाधान ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में हर साल बाढ़ की समस्या आती है। पानी बढ़ने के बाद गांवों में रहने वाले लोगों को बार-बार घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। इस बार भी तीन दिन में हालात तेजी से बदल गए और लोगों को अपना सामान लेकर हाईवे पर शरण लेनी पड़ी। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि तटबंधों को व्यवस्थित और मजबूत किया जाए तो गांवों में आने वाले बाढ़ के पानी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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