कुशीनगर में कुष्ठ अस्पताल की जमीन पर कब्जे का आरोप:शिकायतकर्ता का दावा- कोर्ट के स्टे के बावजूद हुआ नामांतरण
कुशीनगर के पडरौना नगर में बाबा राघव दास कुष्ठ सेवा आश्रम की ट्रस्ट जमीन (आराजी संख्या 1912) में राजस्व अनियमितता और कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है कि न्यायालय के स्टे आदेश के बावजूद विवादित जमीन की खतौनी में नाम दर्ज कर इसे बेच दिया गया और नामांतरण भी हुआ। तीन सितंबर 2021 को एकपक्षीय आदेश के खिलाफ प्रार्थना पत्र के बाद स्टे जारी किया गया था। इसके बावजूद 2025 में इसी आदेश को खतौनी में दर्ज कराने का आरोप है। वर्तमान में पुराने टेनिस कोर्ट और कुष्ठ अस्पताल की जमीन के चारों ओर करीब पांच फीट ऊंची बाउंड्री भी बना दी गई। SDM की भूमिका संदिग्ध बताई इससे अस्पताल में आने-जाने और इलाज की व्यवस्था पर असर पड़ा। इस मामले में एक तत्कालीन एसडीएम की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। उपलब्ध साक्ष्य के अनुसार आराजी संख्या 1912 का कुल रकबा करीब 68 डिसमिल है। इसमें 22.5 डिसमिल जमीन रामजी और बंधु की ओर से 01 जनवरी 1971 को बाबा राघव दास कुष्ठ सेवा आश्रम, देवरिया के पक्ष में रजिस्ट्री की गई थी। बाद में यहां चर्म रोग अस्पताल का निर्माण हुआ, जहां दूर-दराज से आने वाले मरीजों का इलाज किया जाता रहा। इसी आराजी के कुछ हिस्से और सिंचाई विभाग की खाली जमीन पर तत्कालीन जिलाधिकारी गिरधारी लाल के कार्यकाल में 20 फरवरी 2005 को टेनिस कोर्ट का निर्माण कराया गया था। लंबे समय तक यहां खिलाड़ी और प्रशासनिक अधिकारी टेनिस खेलते रहे। बाद में जिला स्टेडियम में टेनिस कोर्ट बनने के बाद पुराने टेनिस कोर्ट का उपयोग कम हो गया। आरोप है कि 30 नवंबर 2009 को मुर्तुजा पुत्र कतलू ने विवादित जमीन का बैनामा कराया। इसके बाद भूमि को लेकर राजस्व न्यायालय में मुकदमा भी चला। उपलब्ध विवरण के मुताबिक करीब 19 डिसमिल जमीन के राजस्व अभिलेख में बाबा राघव दास कुष्ठ सेवा आश्रम का नाम हटाकर मुर्तुजा का नाम संक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज करने का आदेश पारित हुआ। शिकायत के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए थे। लेकिन उनके ट्रांसफर के बाद जांच की प्रगति और निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं।
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