लखीमपुर खीरी में बारिश-तेज हवाओं से फसल बर्बाद:कटाई से पहले धान की पकी फसल खेतों में गिरी, कई जगह गन्ना भी धराशायी

Sep 27, 2026 - 10:26
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लखीमपुर खीरी में बारिश-तेज हवाओं से फसल बर्बाद:कटाई से पहले धान की पकी फसल खेतों में गिरी, कई जगह गन्ना भी धराशायी
लखीमपुर खीरी में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश और तेज हवाएं किसानों के लिए आफत बन गई हैं। खेतों में पानी भरने और तेज हवाओं के कारण धान की पकी फसल जमीन पर बिछ गई है। कटाई से ठीक पहले फसल गिरने से किसानों की छह महीने की मेहनत पर संकट खड़ा हो गया है। कुछ दिन पहले तक जिन खेतों में धान की पकी बालियां हवा के साथ लहरा रही थीं, अब वही फसल पानी और कीचड़ में जमीन से चिपकी नजर आ रही है। किसानों के मुताबिक कटाई में महज एक-दो सप्ताह का समय बचा था। ऐसे में लगातार बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो गिरी हुई फसल के दाने खराब होने का खतरा भी बढ़ सकता है। किसान खेतों की मेड़ पर खड़े होकर बिछी फसल को देखते हुए नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं। तेज हवा से गन्ने की खड़ी फसल भी गिरी बारिश के साथ चली तेज हवाओं का असर गन्ने की फसल पर भी पड़ा है। कई जगह खेतों में खड़ा गन्ना धराशायी हो गया। किसानों का कहना है कि फसल का गिरना सिर्फ पौधों का नुकसान नहीं है, बल्कि इसमें उनकी महीनों की मेहनत और खेती में लगाया गया पैसा भी जुड़ा है। जिले के कई इलाकों में एक जैसा मंजर मितौली, गोला, पलिया, निघासन, धौरहरा और मोहम्मदी समेत जिले के तमाम इलाकों में खेतों का मंजर लगभग एक जैसा है। कहीं धान पानी में डूबा है तो कहीं तेज हवा के कारण पूरी फसल जमीन पर बिछी हुई है। लगातार बारिश के बीच किसान खेतों में पहुंचकर नुकसान का जायजा ले रहे हैं। फसल के साथ परिवार की उम्मीदें भी जुड़ीं किसानों के लिए खेत में खड़ी फसल सिर्फ अनाज नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीद होती है। इसी से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, पुराने कर्ज की अदायगी और अगली फसल की तैयारी जुड़ी होती है। ऐसे में पककर तैयार फसल का कटाई से पहले बर्बाद होना किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है। किसानों ने सर्वे और मुआवजे की मांग की अब किसानों की निगाहें मौसम के साथ प्रशासन पर भी टिकी हैं। किसानों ने बारिश थमने के बाद खेत-खेत सर्वे कराकर फसल नुकसान का वास्तविक आकलन कराने और नियमानुसार राहत व मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि समय रहते नुकसान का आकलन और सहायता मिलने से उन्हें इस संकट से उबरने में मदद मिल सकती है।

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