लखनऊ में 6 साल बाद फिर शुरू हुई 'अवध संध्या':लोकगीत, कथक और मलखम्भ की प्रस्तुतियों ने बांधा समा, मालिनी अवस्थी रहीं मुख्य अतिथि
लखनऊ के उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगेजी ऑडिटोरियम में मंगलवार को ‘अवध संध्या’ का आयोजन किया गया। छह साल बाद फिर शुरू हुई अवध संध्या में लोकगीत, कथक और मलखम्भ की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ लोकगायिका और पद्मश्री मालिनी अवस्थी रहीं। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, राज्य पुरातत्व निदेशालय, राज्य ललित कला अकादमी और राज्य संग्रहालय के सहयोग से किया गया। दीप प्रज्वलन के बाद अकादमी अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह और निदेशक राज कुमार ने मालिनी अवस्थी का स्वागत किया। मालिनी अवस्थी ने छह साल बाद अवध संध्या दोबारा शुरू करने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह लखनऊ की सांस्कृतिक धरोहर है। इसे सोशल मीडिया के जरिए और अधिक लोकप्रिय बनाने की जरूरत है। इस दौरान प्रदर्शनी में पेंटिंग बना रहे कलाकार ने अपने हाथों से बनाई मालिनी अवस्थी की पेंटिंग भी उन्हें भेंट की। धीरे-धीरे से झुलाओ’ से हुई शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत गाजियाबाद के शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायक डॉ. इन्द्रेश कुमार मिश्रा ने ‘धीरे-धीरे से झुलाओ मोरे प्यारे ललना’ से की। इसके बाद लखनऊ के कथक कलाकारों ने ‘कजरी के रंग’ में एक के बाद एक प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने राग मेघ और तीन ताल में ‘बादल गरज नभ घोर शोर’, राग देश में ‘झूलत राधे नवल किशोर’ और दादरा ताल में मिर्जापुरी कजरी ‘घेरि-घेरि आयी सावन की बदरिया’ प्रस्तुत की। इसके बाद नाथद्वारा परंपरा के हवेली संगीत की प्रस्तुति ‘रंग रंगीली छैल छबीलो’ ने भी दर्शकों की तालियां बटोरीं।
मलखम्भ ने दिखाया शक्ति और संतुलन झांसी के रवि प्रकाश परिहार और दल ने मलखम्भ के जरिए शक्ति और संतुलन का प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान की यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए खास आकर्षण रही।
अकादमी परिसर में अवध थीम पर प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें राज्य पुरातत्व निदेशालय, राज्य ललित कला अकादमी और राज्य संग्रहालय की ओर से प्रदर्शित कलाकृतियों को लोगों ने सराहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अलका निवेदन ने किया।
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