लखनऊ में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर पुष्पवर्षा:एक कुंतल फूलों से हुई वर्षा, पुंडरीक महाराज ने कहा- आध्यात्मिक परंपरा में संस्कार का महत्व
लखनऊ के ऐशबाग के डीएवी कॉलेज में चल रही श्रीमद्भागवत राधा रमण कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान कथा पंडाल वृंदावन जैसा दिखा। जन्मोत्सव पर एक कुंतल फूलों की वर्षा हुई, जिससे पूरा पंडाल ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘जय जय राधा रमण हरि बोल’ के जयकारों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालु संकीर्तन में झूमते नजर आए। कथा व्यास पुंडरीक गोस्वामी ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा में संस्कार और परिवार का विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति में रिश्तों और कर्तव्यों को हमेशा प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने भगवान श्रीराम और विभीषण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि संस्कार और कर्तव्य जीवन का अहम हिस्सा हैं। भगवान श्रीकृष्ण ही सब कुछ संभाल लेंगे उन्होंने कहा कि भोजन में नमक जिस तरह स्वाद बढ़ाता है, उसी तरह भक्ति जीवन को सार्थक बनाती है। भगवान की भक्ति के लिए कोई उम्र तय नहीं है। व्यक्ति जीवन के किसी भी पड़ाव पर भगवान की शरण में जा सकता है। धीरे-धीरे भक्त के मन में यह विश्वास मजबूत होता है कि भगवान श्रीकृष्ण ही सब कुछ संभाल लेंगे। यही विश्वास उसे चिंता से मुक्त करता है। बाल लीलाओं का वर्णन सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु पुंडरीक गोस्वामी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि वृंदावन में श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप नंदबाबा, यशोदा मैया और बलराम के वात्सल्य में पला-बढ़ा। बाल लीलाओं का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। गुब्बारों, फलों और रंगोली से सजा पंडाल आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि जन्मोत्सव के लिए पंडाल को गुब्बारों, फलों और रंगोली से सजाया गया था। भगवान के जन्म की खुशी में एक कुंतल फूलों की पुष्पवर्षा की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार के साथ मौजूद रहे। सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों ने पंडाल की व्यवस्था के साथ यातायात व्यवस्था भी संभाली। आयोजक अमरनाथ मिश्र ने श्रद्धालुओं, यजमानों, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार जताया।
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