लखनऊ रामोत्सव में भरत मिलाप का मंचन:राम ने पिता का वचन निभाया, भरत चरण पादुका लेकर लौटे; चलाया राजपाट
लखनऊ के ऐशबाग रामलीला मैदान में चल रहे रामोत्सव में गुरुवार को भरत मिलाप का भावुक प्रसंग मंचित किया गया। चित्रकूट में श्रीराम से मिलने पहुंचे भरत ने उन्हें अयोध्या लौटने का आग्रह किया, लेकिन श्रीराम पिता दशरथ को दिए वचन पर अडिग रहे। इसके बाद भरत श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटे और उन्हें सिंहासन पर रखकर 14 वर्ष तक राजपाट चलाने का संकल्प लिया। रामलीला की शुरुआत वन में श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा कुटिया निर्माण से हुई। कुटिया बनने के बाद माता सीता वहां रहने लगीं। इसी बीच भरत गुरु वशिष्ठ, तीनों माताओं और मंत्रिमंडल के साथ श्रीराम को वापस लाने वन की ओर निकले। रास्ते में उनकी भेंट निषादराज से हुई। इसके बाद सभी चित्रकूट के कामदगिरि पहुंचे। अयोध्या की सेना को देखकर लक्ष्मण को लगा कि भरत युद्ध के लिए आए हैं। वह क्रोधित हुए, लेकिन श्रीराम ने उन्हें समझाया कि भरत के मन में ऐसा कोई भाव नहीं हो सकता। भरत के पहुंचने पर श्रीराम और उनका भावुक मिलन हुआ। भरत सहित सभी ने उन्हें वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटने के लिए कहा। कैकेयी ने भी अपना वचन वापस लेने की बात कही, लेकिन श्रीराम ने पिता के वचन को सर्वोपरि रखा। नंदीग्राम में कुटिया बनाकर रहने लगे भरत भरत ने श्रीराम की चरण पादुकाएं सिंहासन पर रखीं और राजसी सुखों का त्याग कर नंदीग्राम में कुटिया बनाकर रहने लगे। उन्होंने वनवासी का भेष धारण कर वहीं से राजकीय कार्य संचालित करने का निर्णय लिया। प्रेम, त्याग, विरह और भाई के प्रति समर्पण के इन दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कैकेयी भी खुद को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार मानकर विलाप करती नजर आईं। रामलीला से पहले क्रिएटिव डांस एकेडमी के कलाकारों ने राम आएंगे, कृष्णलीला, गणेश वंदना, ऐ गिरिनंदिनी, राम सियाराम और शिव तांडव पर नृत्य प्रस्तुतियां दीं। दीपशिखा सिन्हा के निर्देशन में श्रीराम के जीवन संदेशों पर आधारित नृत्य नाटिका भी पेश की गई।
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