मां-बाप और 2 भाइयों का पिंडदान करने गए-व्यक्ति की मौत:बिहार के गया में अस्थियां विसर्जित कर लौटते समय सीने में उठा दर्द
शाहजहांपुर के पुवायां क्षेत्र के कुंवरपुर जबती गांव निवासी सत्यप्रकाश (53) की बिहार के गया में पिंडदान के बाद मौत हो गई। वह अपने माता-पिता और दो भाइयों की अस्थियां लेकर 29 सितंबर को पत्नी सत्यवती के साथ निकले थे। 3 अक्टूबर को गया में पिंडदान के बाद मंदिर से प्रसाद लेने निकले, तभी उनके सीने में तेज दर्द उठा। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सत्यप्रकाश का शव रविवार सुबह गांव पहुंचा। दोपहर करीब दो बजे फर्रुखाबाद के घटियाघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी मौत से परिवार में मातम छा गया। सत्यप्रकाश मजदूरी कर पत्नी, बेटे, बहू और चार पोते-पोतियों का पालन-पोषण करते थे। 35 साल से संभालकर रखी थीं परिजनों की अस्थियां सत्यप्रकाश के पिता रामनारायण की करीब 35 साल पहले सांस की बीमारी से मौत हुई थी। 17 साल पहले मां सुजेश्वरी देवी का निधन हो गया। करीब 20 साल पहले बड़े भाई ओमप्रकाश की सड़क हादसे में मौत हुई, जबकि 17 साल पहले दूसरे भाई जयप्रकाश की बीमारी से जान चली गई। इन सभी की अस्थियां अब तक विसर्जित नहीं हो सकी थीं। सत्यप्रकाश ने सभी की अस्थियां लेकर गया और प्रयागराज में विसर्जन व पिंडदान करने का फैसला किया।
29 सितंबर को पत्नी के साथ निकले थे सत्यप्रकाश 29 सितंबर को पत्नी सत्यवती के साथ घर से निकले थे। 30 सितंबर को प्रयागराज पहुंचे, जहां उन्होंने स्नान करने के बाद अस्थियां विसर्जित कीं और पिंडदान किया। इसके बाद 3 अक्टूबर को गया पहुंचे। वहां पिंडदान करने के बाद मंदिर के लिए प्रसाद लिया और बाहर निकलते ही उनके सीने में तेज दर्द शुरू हो गया। दुकानदार के पैर छुए, साथियों को बुलाने को कहा पत्नी सत्यवती ने बताया कि उस समय साथ गए कुछ लोग आगे निकल चुके थे। उनके पास मोबाइल फोन भी नहीं था। तेज दर्द होने पर सत्यप्रकाश ने उन्हें आवाज देकर कहा कि अब वह नहीं बचेंगे। इसके बाद उन्होंने एक दुकानदार के पैर छुए और उससे साथियों को फोन करने के लिए कहा। दुकानदार ने साथियों को सूचना दी। कुछ देर बाद साथी पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बेटे के साथ मजदूरी कर चलाते थे परिवार सत्यप्रकाश गांव में पत्नी सत्यवती, बेटे बब्लू, बहू शिवानी और उनके चार बच्चों के साथ रहते थे। वह बेटे के साथ मेहनत-मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते थे। गया में अचानक हुई मौत की खबर के बाद परिवार के लोग शव लेकर रविवार सुबह गांव पहुंचे। दोपहर में घटियाघाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)