मां सती के मुकुट गिरने की मान्यता से जुड़ा धाम:कानपुर देहात में नवरात्र के पहले दिन मुक्तेश्वरी मंदिर में उमड़ी भीड़, भक्तों ने दर्शन किए

Oct 11, 2026 - 09:40
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मां सती के मुकुट गिरने की मान्यता से जुड़ा धाम:कानपुर देहात में नवरात्र के पहले दिन मुक्तेश्वरी मंदिर में उमड़ी भीड़, भक्तों ने दर्शन किए
कानपुर देहात में शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार सुबह से ही कानपुर देहात के प्रसिद्ध मां मुक्तेश्वरी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने कतारों में लगकर माता रानी के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में नवरात्र के अवसर पर मेला भी लगा है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मां के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आ रहा है। कानपुर देहात स्थित मुक्तेश्वरी देवी मंदिर को मुकुटेश्वरी शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही पवित्र स्थान है जहां माता सती का मुकुट गिरा था। इसी मान्यता के चलते इस धाम का नाम मुकुटेश्वरी पड़ा, जो आगे चलकर मुक्तेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। हालांकि, इस मान्यता से जुड़े प्राचीन इतिहास का स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट नहीं है, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर से गहराई से जुड़ी हुई है। भगवान शिव और माता सती की कथा से जुड़ा धाम पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने से आहत माता सती ने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए थे। इसके बाद भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंडित किया। मान्यता है कि उनके शरीर के विभिन्न अंग और आभूषण अलग-अलग स्थानों पर गिरे, जो आगे चलकर शक्तिपीठों के रूप में प्रसिद्ध हुए। मुक्तेश्वरी देवी मंदिर भी इसी पौराणिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है। मंदिर की अनूठी मान्यताएं हैं आकर्षण का केंद्र मंदिर को लेकर एक मान्यता यह भी प्रचलित है कि माता रानी के दर्शन दिन में तीन अलग-अलग स्वरूपों में होते हैं। मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन पत्थर की आकृतियों को लेकर भी कई लोककथाएं प्रचलित हैं। श्रद्धालु नवरात्र के दौरान माता को चुनरी, नारियल और श्रृंगार का सामान चढ़ाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। मुक्तेश्वरी देवी धाम धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव की मिसाल के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर के लिए जुवैदा नाम की मुस्लिम महिला द्वारा जमीन दान किए जाने की कहानी भी स्थानीय स्तर पर प्रचलित है। नवरात्र के पहले दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने मंदिर में उत्सव का माहौल बना दिया है। सुबह से दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी है और भक्त मां मुक्तेश्वरी के दरबार में मत्था टेककर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

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