मासूम को क्लास में जबरन ‘चोर’ बना बच्चों से पिटवाया:मुरादाबाद के एस.एल. एजुकेशन स्कूल पर गंभीर आरोप, RTE में हुआ था एडमिशन
मुरादाबाद में पाकबड़ा थाना क्षेत्र के गांव पल्लूपुरा घोसी स्थित 'एस.एल. एजुकेशन' स्कूल पर कक्षा चार के एक 10 वर्षीय छात्र को प्रताड़ित कर स्कूल से निकालने का आरोप लगा है। पीड़ित छात्र शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत मुफ्त शिक्षा पा रहा था। मामले को लेकर पीड़ित मासूम और उसकी मां ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। गांव पल्लूपुरा घोसी के रहने वाले पीड़ित छात्र अजीत प्रताप सिंह (10 साल) पुत्र रामकिशोर ने बताया, "स्कूल में मेरे साथ मेरी जाति को लेकर हमेशा भेदभाव किया जाता है और सबसे पीछे बिठाया जाता है। बीते 14 अक्टूबर को खेल के दौरान अध्यापिका सोनिया मैम ने मुझे जबरदस्ती ‘चोर’ बना दिया और दूसरे बच्चों से कहा कि इसे पीछे से मारो। जब मैंने रोते हुए इसका विरोध किया, तो स्टाफ के जावेद सर ने मुझे डांट-फटकार कर स्कूल से निकाल दिया और कहा कि अब तुम्हारा नाम काट दिया गया है।" बच्चे के रोते हुए घर पहुँचने पर जब उसकी मां स्कूल में शिकायत करने गईं, तो वहां मौजूद स्टाफ ने उनके साथ भी घोर बदसलूकी की। पीड़ित मां ने अपने बयान में कहा, "स्कूल के स्टाफ जावेद, सोनिया और योगेश चंद्र ने मुझे सरेआम जातिसूचक शब्द कहे और गंदी गालियां दीं। उन्होंने कहा कि तुम्हारा बच्चा यहाँ मुफ्त में पढ़ रहा है, वह स्कूल पर बोझ है। अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) में भी मुझे अपमानित किया गया था। ये लोग हर साल हमसे जबरन 'बिल्डिंग फीस' वसूलते हैं और इस साल भी ₹9,000 ले चुके हैं। पैसे भी रख लिए और अब हमारे बच्चे का भविष्य भी बर्बाद कर रहे हैं।" पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से मांग की है कि 14 अक्टूबर की घटना के स्कूल के CCTV फुटेज और फीस रिकॉर्ड को तत्काल सुरक्षित किया जाए, ताकि साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो। साथ ही बच्चे का निष्कासन रद्द कर उसकी पढ़ाई दोबारा शुरू कराई जाए और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। यह मामला शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 के नियमों का सीधा उल्लंघन है, जो बच्चों के शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न और निष्कासन पर रोक लगाता है। जिला प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
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