महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष ने उठाए सवाल:बोलीं- 2 माह से शिकायतों पर कार्रवाई नहीं, साइबर उत्पीड़न और वीडियो से छेड़छाड़ के लगाए आरोप
शामली में उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष पूनम तोमर ने बेसिक शिक्षा विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शनिवार शाम 5 बजे सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर साइबर उत्पीड़न, वीडियो से छेड़छाड़ और व्हाट्सएप ग्रुपों में आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप लगाए। उनका कहना है कि करीब दो माह से शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई, जबकि विभाग ने उन्हें ही स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर दिया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विभाग और पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है। वीडियो से छेड़छाड़ कर प्रसारित करने का आरोप पूनम तोमर के अनुसार, करीब दो माह पहले राष्ट्रीय स्तर के नेशनल एडवेंचर कैंप के एक सार्वजनिक वीडियो को कथित तौर पर डाउनलोड कर उसके एक हिस्से को काट-छांटकर विभागीय व्हाट्सएप ग्रुपों में प्रसारित किया गया। आरोप है कि संपादित वीडियो के साथ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की गईं। उन्होंने इसे अपनी और एक अन्य शिक्षिका की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास बताया। शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का दावा पूनम तोमर का कहना है कि उन्होंने स्क्रीनशॉट, वीडियो क्लिप और मोबाइल नंबरों सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस और विभाग से शिकायत की, लेकिन करीब दो माह बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने प्रदीप कुमार, जयविन्द्र, सचिन चौहान, संजीव कुमार मलिक सहित अन्य शिक्षकों पर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि नामजद शिक्षकों के खिलाफ न तो निलंबन की कार्रवाई हुई और न ही प्रभावी विभागीय कार्रवाई की गई। उन्होंने मामले में पक्षपात और राजनीतिक रसूख के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया है। जांच बैठक के बाद नोटिस जारी करने पर सवाल पूनम तोमर के मुताबिक, 7 अक्टूबर को हुई विभागीय जांच बैठक में वह अपनी साथी शिक्षिका नीरू नैन के साथ पहुंची थीं। उनका आरोप है कि संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही 9 अक्टूबर को कथित अनधिकृत रिकॉर्डिंग के संबंध में स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर दिया गया। इस पर सफाई देते हुए पूनम तोमर ने कहा कि कार्यालय में मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण उन्होंने हॉटस्पॉट चालू करने के लिए मोबाइल निकाला था। उपस्थिति पुस्तिका पर हस्ताक्षर करते समय मोबाइल टेबल पर रह गया। उनका दावा है कि मोबाइल में कोई रिकॉर्डिंग एप सक्रिय नहीं था। उन्होंने जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की है। निष्पक्ष जांच और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की मांग पूनम तोमर ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी महिला शिक्षक को अपनी शिकायत रखने के कारण प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने नामजद शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने, डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराने, व्हाट्सएप चैट और वीडियो की जांच करने तथा राज्य या मंडल स्तर की स्वतंत्र महिला जांच समिति गठित करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने अपने और सहयोगी शिक्षिका के खिलाफ जारी नोटिस को लेकर भी निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई है। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग और पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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