मऊ पुलिस ने लौटाए साइबर ठगी के 60 हजार रुपये:दो पीड़ितों के खाते में लौटे रुपये, APK फाइल और UPI से हुआ था फ्रॉड
मऊ जिले में साइबर ठगी के 2 मामलों में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पीड़ितों के कुल 60 हजार रुपये वापस कराए हैं। साइबर क्राइम थाना मऊ ने APK फाइल के जरिए हुई ठगी के मामले में 50 हजार रुपये वापस कराए, जबकि घोसी साइबर पुलिस टीम ने यूपीआई के माध्यम से ठगी गई 10 हजार रुपये की पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस कराई। पुलिस ने लोगों से अनजान APK फाइल डाउनलोड न करने और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की अपील की है। पुलिस अधीक्षक सर्वेश कुमार मिश्रा के निर्देशन में साइबर अपराधों की रोकथाम और ठगी के शिकार लोगों की धनराशि वापस कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के पर्यवेक्षण में दोनों मामलों में कार्रवाई की गई। APK फाइल डाउनलोड करने के बाद ठगी पहला मामला मुंशीपुरा के रहने वाले जावेद खान पुत्र मोहम्मद अमीन खान से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, अज्ञात APK फाइल के माध्यम से उनके साथ साइबर धोखाधड़ी की गई थी। इस दौरान उनके खाते से कुल 2,09,736 रुपये की ठगी हुई थी। मामले में मुकदमा अपराध संख्या 12/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है। साइबर क्राइम थाना मऊ की टीम ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए ठगी गई रकम में से 50 हजार रुपये पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराए। UPI ठगी के पीड़ित को लौटाए 10 हजार रुपये दूसरा मामला घोसी थाना क्षेत्र के गोफा अमिला निवासी दिलनवाज पुत्र शमीम से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, उनके साथ यूपीआई के माध्यम से साइबर ठगी हुई थी। घोसी साइबर पुलिस टीम ने 18 अक्टूबर 2026 को एमआरएम पोर्टल के माध्यम से कार्रवाई करते हुए ठगी गई 10 हजार रुपये की पूरी धनराशि पीड़ित को वापस कराई। इस तरह दोनों मामलों में पुलिस ने कुल 60 हजार रुपये वापस कराने में सफलता हासिल की।
अनजान APK फाइल और लिंक से रहें सावधान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजी गई APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। अज्ञात लिंक पर क्लिक करने से भी बचें। इसके अलावा केवाईसी अपडेट, ऑनलाइन निवेश, लोन और पार्ट टाइम नौकरी के नाम पर आने वाले फर्जी कॉल और संदेशों से सतर्क रहें। पुलिस ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। यदि साइबर ठगी हो जाए तो तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस के अनुसार, ठगी होने के तुरंत बाद शिकायत करने से संदिग्ध लेनदेन पर समय रहते कार्रवाई करने और धनराशि वापस कराने की संभावना बढ़ सकती है।
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