मथुरा के कोसी का ऐतिहासिक भरत मिलाप मेला:पुष्पक विमान में विराजकर अवध पहुंचे राम,भक्तों ने भरत को कंधों पर चलाकर दिया रास्ता
मथुरा के कोसी में चल रही रामलीला के मंचन के दौरान गुरुवार की रात को अद्भुत दृश्य को देखने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। यहां रावण वध कर जब प्रभु श्री राम पुष्पक विमान से वापस लौटे तो भरत जी उनसे मिलने के लिए लोगों के कंधों पर चलाकर गए। इस भरत मिलाप लीला के दौरान पूरा मेला क्षेत्र प्रभु राम सहित चारों भाइयों के जयकारों से गूंज उठा। भरत मिलाप देखने पहुंचे 50 हजार से ज्यादा लोग कोसी का भरत मिलाप मेला ऐतिहासिक है। इसे देखने के लिए मथुरा ही नहीं बल्कि हरियाणा,राजस्थान और दिल्ली से भी लोग पहुंचते हैं। यही वजह है कि भरत मिलाप मेला के दौरान कोसी शहर की गलियों में लोग ही लोग नजर आते हैं। पूरा कोसी शहर इस दौरान आकर्षक तरीके से सजाया जाता है। इस अवसर पर यहां का नजारा अलग ही छटा बिखेरता है। भरत मिलाप का दृश्य देखने के लिए गुरुवार की रात यहां 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। प्रभु राम के वापस आने की सूचना पर दौड़ पड़े भरत रामलीला मंचन के दौरान गुरुवार की रात भरत मिलाप चौक पर सजी अवध पूरी में भरत और शत्रुघ्न भगवान राम के वनवास के 14 वर्ष पूरे होने के बाद वापस लौटने की प्रतीक्षा करते हैं। देर रात जैसे ही हनुमान जी भरत जी को यह सूचना देते हैं कि प्रभु राम वापस आ गए हैं तो भरत और शत्रुघ्न जी बिना पल गंवाए वहां मौजूद भीड़ के कंधों पर चलकर पुष्पक विमान तक पहुंचते हैं और प्रभु श्री राम के चरणों छूकर उनके गले से लिपट जाते हैं। यह दृश्य देख पूरा मेला क्षेत्र भाव में डूब जाता है। पुष्पक विमान में विराजमान होकर पहुंचे प्रभु राम गुरुवार की रात भरत मिलाप लीला से पहले कोसी में प्रभु श्री राम,माता सीता,भाई लक्ष्मण और हनुमान जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। आकर्षक तरीके से सजे पुष्पक विमान में विराजमान राम,लक्ष्मण,जानकी और हनुमान जी की सवारी शहर के जिस रास्ते से निकली वहीं लोगों ने उनकी आरती उतारकर स्वागत किया। देसी विदेशी फूलों से सजे पुष्पक विमान में विराजमान भगवान की छवि जिसने देखी उसकी नजर हटी ही नहीं। लोगों का खड़ा हुजूम उनको निहारता रहा। 200 साल से हो रहा रामलीला का मंचन कोसी में आयोजित भरत मिलाप मेला के आयोजकों ने बताया यहां रामलीला का मंचन 200 साल से ज्यादा समय से चल रहा है। तभी से भरत मिलाप मेला होता चला आ रहा है। भगवान का श्रृंगार करने वाले मनोज ने बताया कि वह 30 साल से इस काम को कर रहे हैं। रामलीला के दौरान डेढ़ महीने तक वह प्रभु श्री राम की सेवा में लगे रहते हैं। उन्होंने बताया कि यहां की लीला मार्मिक और मर्यादित होती है। लीला सभी जगह होती है लेकिन यहां लीला के दौरान इस तरह सेवा की जाती है जैसे मंदिर में भक्त अपने आराध्य की करते हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)