‘एफआईआर में मेरा नाम भी जोड़ो’, अभिजीत दीपके और सौरव दास का बड़ा बयान!

उदयपुर के आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के अभियान के बीच विवाद बढ़ गया है। आशुतोष रांका ने शिक्षकों को डराने और ग्रामीणों पर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया। इसके बाद अभिजीत दीपके और सौरव दास ने रांका के समर्थन में प्राथमिकी में अपना नाम भी जोड़ने की बात कही। मामले में प्रशासन और शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

Sep 22, 2026 - 14:36
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‘एफआईआर में मेरा नाम भी जोड़ो’, अभिजीत दीपके और सौरव दास का बड़ा बयान!

दि राइजिंग न्यूज़ | उदयपुर | 22 सितंबर 2026

राजस्थान के उदयपुर के आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों की स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का अभियान जारी है। विद्यालयों के निरीक्षण के बाद आशुतोष रांका ने शिक्षकों को कथित रूप से डराने-धमकाने और ग्रामीणों पर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए दबाव बनाए जाने का दावा किया। इसके बाद अभिजीत दीपके और सौरव दास ने सार्वजनिक रूप से रांका के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी।

उदयपुर के विद्यालयों को लेकर क्यों बढ़ा विवाद

उदयपुर के आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से निरीक्षण अभियान चलाया गया। पार्टी के नेताओं ने कई विद्यालयों में भवन, पेयजल, शौचालय, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का दावा किया। इससे विद्यालयों की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि जिन विद्यालयों का उनकी टीम ने निरीक्षण किया था, वहां की स्थिति सामने आने के बाद शिक्षकों और ग्रामीणों पर दबाव बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि विद्यालयों का निरीक्षण कराने वाले ग्रामीणों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कोशिश की जा रही है। इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

आशुतोष रांका ने क्या कहा

आशुतोष रांका ने अपने बयान में कहा कि उनकी टीम ने जिन विद्यालयों की जर्जर स्थिति और बुनियादी समस्याओं को सामने रखा, उनकी तस्वीरें सार्वजनिक की गई थीं। उनका दावा है कि इसके बाद विद्यालयों के शिक्षकों को डराने-धमकाने और ग्रामीणों के खिलाफ कार्रवाई कराने की कोशिश की जा रही है। रांका ने इस पूरे मामले को विद्यालयों की स्थिति सुधारने के अभियान से जोड़कर देखा है।रांका ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को संबोधित करते हुए कहा कि यदि विद्यालयों की स्थिति सामने लाने के कारण प्राथमिकी दर्ज की जानी है, तो सबसे पहले उनका नाम उसमें शामिल किया जाए। उन्होंने अपनी टीम का नाम भी प्राथमिकी में जोड़ने की बात कही। रांका ने गिरफ्तारी की स्थिति में प्रदेशभर में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है।

अभिजीत दीपके ने क्यों कहा- मेरा नाम भी जोड़िए

आशुतोष रांका के बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने उनके समर्थन में प्रतिक्रिया दी। दीपके ने कहा कि प्राथमिकी में उनका नाम भी जोड़ा जाए। उनके बयान का उद्देश्य यह बताना था कि विद्यालयों की स्थिति को लेकर चलाए जा रहे अभियान में वह रांका के साथ खड़े हैं।अभिजीत दीपके इससे पहले भी राजस्थान में विद्यालयों के निरीक्षण को लेकर सामने आए विवादों पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। अगस्त में जयपुर के एक सरकारी विद्यालय के दौरे के दौरान विवाद और कथित झड़प को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए थे। उस घटना को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग दावे सामने आए थे।

सौरव दास ने खुद को बताया ‘सह-आरोपी’

अभिजीत दीपके के बाद पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने भी आशुतोष रांका के बयान पर प्रतिक्रिया दी। दास ने सरकारी विद्यालयों को बेहतर बनाने के अभियान में खुद को ‘सह-आरोपी’ के रूप में शामिल करने की बात कही। उनका बयान रांका की उस चुनौती के समर्थन में था, जिसमें उन्होंने प्राथमिकी और गिरफ्तारी की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दी थी।इससे विवाद का राजनीतिक और सार्वजनिक पक्ष और अधिक चर्चा में आ गया है। हालांकि, रांका की ओर से लगाए गए शिक्षकों को डराने और ग्रामीणों पर प्राथमिकी का दबाव बनाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

किन विद्यालयों का किया गया निरीक्षण

कॉकरोच जनता पार्टी की टीम ने उदयपुर के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में कई सरकारी विद्यालयों का निरीक्षण किया। इनमें नयागांव तहसील के देमात, पोंगली और बाबरी सहित आसपास के क्षेत्र शामिल बताए गए हैं। पार्टी का कहना है कि निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में कई बुनियादी समस्याएं सामने आईं।पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानों पर जर्जर दीवारें, उखड़ा हुआ छत का पलस्तर, खराब हैंडपंप, गंदगी और शौचालय जैसी समस्याओं का दावा किया गया। इससे पहले भी उदयपुर के सरकारी विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, बिजली और भवन जैसी सुविधाओं की कमी को लेकर रिपोर्टें सामने आई हैं।

विद्यालयों की स्थिति पर लगातार उठ रहे सवाल

विद्यालय निरीक्षण के दौरान बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। रांका ने पहले भी उदयपुर क्षेत्र के विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ पानी, साफ शौचालय, बिजली, पंखे और पर्याप्त फर्नीचर जैसी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने प्रशासन के सामने तत्काल सुधार की मांग रखने की बात कही थी। हाल के दिनों में इस अभियान के तहत विद्यालयों की स्थिति को सार्वजनिक करने और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, सरकारी विद्यालय परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश, तस्वीरें लेने और बातचीत करने को लेकर राजस्थान सरकार की ओर से दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। इससे अभियान और प्रशासन के बीच विवाद का एक अलग पक्ष भी सामने आया है।

करीब 1500 करोड़ रुपये के बजट पर भी सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी ने आदिवासी क्षेत्र विकास से जुड़े करीब 1500 करोड़ रुपये के बजट के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए उपलब्ध राशि का पर्याप्त लाभ विद्यालयों और विद्यार्थियों तक दिखाई नहीं दे रहा है। पार्टी ने शिक्षा और विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं पर खर्च को लेकर जवाब मांगा है।पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि कुछ क्षेत्रों में ग्रामीण स्वयं चंदा जुटाकर विद्यालयों की आवश्यकताओं को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, बजट के उपयोग को लेकर किए गए इन दावों और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें पार्टी के दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

आशुतोष रांका ने शिक्षकों को कथित रूप से डराने और ग्रामीणों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। अभिजीत दीपके और सौरव दास ने इन आरोपों के बीच रांका के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, संबंधित प्रशासन या शिक्षा विभाग की ओर से इन विशेष आरोपों पर आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में प्राथमिकी दर्ज होने, शिक्षकों पर दबाव बनाने या ग्रामीणों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। विद्यालयों की वास्तविक स्थिति और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों पर आगे की जानकारी आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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