मुस्कान जेल में रो रही, कैदी नंबर-396 मिला:नाश्ता छोड़ा, बेटी से मिलने के लिए लेटर लिखेगी; प्रेमी साहिल से खेती के काम कराए गए
मेरठ के सौरभ हत्याकांड में फांसी की सजा मिलने के बाद दोषी साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी की जेल में जिंदगी कठिन हो गई है। गुरुवार को दोनों का सजायाफ्ता कैदी के तौर पर पहला दिन रहा। मुस्कान को कैदी नंबर-396 और साहिल को 395 की पहचान मिली। साहिल ने खुद को नए नियमों में ढालना शुरू कर दिया, जबकि मुस्कान सदमे में रही। वह रातभर रोती रही। खाना नहीं खाया। जेल प्रशासन ने उसकी काउंसलिंग शुरू कराई है। मुस्कान अपनी बेटी से मिलने के लिए बेचैन है और माता-पिता को लेटर लिखेगी। काउंसलर से उसने पूछा- अब हमारा आगे क्या होगा? फांसी से बचने का कोई रास्ता है या नहीं। वहीं, साहिल ने अन्य कैदियों के साथ खेतों पर काम किया। साहिल ने आज गुरुवार को कैदियों जैसा ड्रेस सफेद कुर्ता-पायजामा पहना तो मुस्कान क्रीम रंग के सूट पहनी। मुस्कान रात में रोती रही, खाना नहीं खाया, काउंसिलिंग शुरू दरअसल, बुधवार शाम सजा होते ही साहिल दोनों को वापस उनकी बैरक में भेज दिया गया। रात में जेल प्रशासन ने साहिल को सजायाफ्ता कैदियों की बैरक नंबर 15 में शिफ्ट कर दिया। जबकि, 10 माह की बेटी के साथ रह रही मुस्कान को फिलहाल उसकी पुरानी बैरक 12-बी में ही रखा गया है। वहां वह अपनी बेटी के साथ ही है। सजा सुनाए जाने के बाद बैरक में पहुंचे साहिल-मुस्कान ने रात में खाना नहीं खाया। साहिल अपनी नई बैरक में पहुंचकर लेट गया, लेकिन मुस्कान लगातार रोती रही। सूचना पाकर जेल प्रशासन अलर्ट हुआ और रात में ही काउंसिलिंग शुरू कराई। मुस्कान ने खाना तो ले लिया, लेकिन रात में खाया नहीं। मुस्कान ने नाश्ता तो लिया, लेकिन आधे से ज्यादा छोड़ दिया गुरुवार को बाकी कैदियों और बंदियों के साथ ही साहिल-मुस्कान भी सुबह 6.30 बजे उठे। जब सभी की गिनती हो रही थी, उस वक्त भी मुस्कान बैरक में बैठी रोती दिखाई दी। कुछ समय बाद कैदियों को नाश्ता मिलता देख साहिल ने भी नाश्ता ले लिया। मुस्कान की फिर काउंसलिंग कराई गई, जिसके बाद मुस्कान ने भी नाश्ता ले लिया। हालांकि, वह पूरा खा नहीं सकी। नाश्ता आधे से ज्यादा छोड़ दिया। जेल सूत्रों की मानें तो सजा होने के बाद साहिल से कहीं ज्यादा मुस्कान परेशान है। वह बात-बात पर भावुक हो रही है। कभी वह बेटी को देखकर रोने लगती है तो कभी खुद को कोसती है। काउंसलर से भी पहला सवाल मुस्कान ने ही पूछा। काउंसर से मुस्कान बोली- फांसी से कैसे बच सकेंगे मुस्कान अपनी बड़ी बेटी से मिलने के लिए बेताब है। क्योंकि जेल प्रशासन के पास मुस्कान के परिवार का कोई कॉन्टैक्ट नंबर नहीं है, इसलिए उसे लेटर लिखने के बारे में बताया गया है। मुस्कान जल्द अपने माता-पिता के नाम लेटर जेल से भेजेगी। बेटी से मिलवाने के लिए गुजारिश करेगी। बता दें कि मुस्कान की बड़ी बेटी अपनी नानी के पास है। छोटी बेटी जेल में जन्मी, वो मुस्कान के साथ ही है। मुस्कान ने काउंसर से पूछा- अब मेरा आगे क्या होगा? हमारी दो छोटी बच्चियां हैं। फांसी से बचने का क्या रास्ता है? इसके बाद जेल काउंसलर ने हायर कोर्ट में अपील की पूरी प्रक्रिया के बारे में समझाया, इसके बाद मुस्कान सामान्य होने लगी। बारिश में कैदियों के साथ खेत पर काम करने निकला साहिल जेल में मुस्कान को कैदी नंबर 396 और साहिल कैदी नंबर 395 के रूप में बुलाए जा रहे हैं। दोनों को अन्य कैदियों की तरह काम भी करना होगा। मुस्कान महिलाओं के साथ सिलाई-कढ़ाई करेगी तो साहिल खेतों में सब्जियों की देखभाल में लगा है। गुरुवार सुबह बारिश के बावजूद साहिल अन्य कैदियों के साथ खेत पर काम करने गया। दोनों की निगरानी बढ़ाई गई, काउंसिलिंग का शेड्यूल तय वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया- मुस्कान और साहिल ने रात में खाना ले लिया था, लेकिन खाया नहीं। देर रात ही बैरक में निगरानी बढ़ाकर दोनों की काउंसिलिंग शुरू करा दी गई। साहिल सामान्य हो रहा है, जबकि मुस्कान को थोड़ा समय लगेगा। मुस्कान की काउंसिलिंग का शेड्यूल तय कर दिया गया है। दिन में दो बार उसकी काउंसिलिंग हो रही है। मेडिकल चेकअप भी दोनों का दिन में दो बार किया जा रहा है। मुस्कान ने कैसे सौरभ का मर्डर किया, पढ़िए ----------------------- ये खबर भी पढ़िए- मुस्कान-साहिल को सजा-ए-मौत लिख जज ने पेन फेंका: लिखा- फांसी पर तब तक लटकाओ, जब तक मौत न हो; महाभारत का श्लोक पढ़ा "दोषी (मुस्कान-साहिल) की गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक मौत न हो जाए।" मेरठ जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने बुधवार शाम 4.22 बजे यह फैसला सुनाया। फैसला सुनते ही कोर्ट रूम में कुर्सी पर बैठी सौरभ की मां और भाई रोने लगे। सौरभ की मां ने हाथ जोड़ते हुए कोर्ट को शुक्रिया किया। वो साड़ी के पल्लू से अपने आंसू पोंछने लगीं। पढ़ें पूरी खबर…
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