'मुस्कान-रविता को फांसी पर लटकाते वक्त हाथ नहीं कांपेंगे':मेरठ में पवन जल्लाद बोले- मां से बेटे छीनने वालों की सजा कम नहीं हो
'ये नीला ड्रम और सांपकांड ही क्यों? फांसी तो केतन, राजा, अतुल पंवार और तालिब की हत्या करने वाली सिया, सोनम, दामिनी, इल्मा और इनके प्रेमियों को भी होनी चाहिए। मांओं से उनके बेटों को छीनने वाले इन लोगों को सजा जरूर मिलनी चाहिए। महिला-पुरुष नहीं, ये तो अपराधी हैं। मुस्कान, साहिल, रविता, अमरदीप किसी को भी फांसी पर लटकाते वक्त न मेरे हाथ कांपेंगे, न मन डोलेगा। ये मेरे लिए गर्व की बात है। बस डेथ वारंट जारी हो, मेरे तख्ते पर आ जाएं। फिर मैं ऐसे निर्मम हत्यारों को अपने हाथों से फांसी पर चढ़ाऊंगा।' पूरे देश में फांसी देने वाले इकलौते पवन जल्लाद ने ये बातें मेरठ में दैनिक भास्कर से खास बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि अपराधियों को दंडित कर कानून ने अपना काम किया। अब ये चाहे सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट या राष्ट्रपति के पास जाएं, इनके लिए कोई दया नहीं होनी चाहिए। पूरी बातचीत पढ़िए… हत्यारी पत्नियों को अदालत से लेकर राष्ट्रपति भी माफ न करें पवन जल्लाद ने कहा- मुस्कान, रविता चाहे जो भी हों, इनको फांसी चढ़ाकर मैं खुद को सौभाग्यशाली समझूंगा। इनके प्रेमी जो दूसरों के बेटों को डस गए, उनके घरों को उजाड़ दिया, इनको जीने का कोई हक नहीं। रविता, साहिल, मुस्कान, सिया, सोनम, इल्मा, दामिनी, तुषार या अमरदीप… ये जो भी हैं, सबको फांसी होना चाहिए। जो बच रहे हैं, कानून उनको भी फांसी की सजा सुनाए। मैं चाहता हूं कि इनकी फांसी को अदालत से लेकर राष्ट्रपति भी माफ न करें। तभी समाज में एक संदेश जाएगा कि पति-पत्नी का रिश्ता कितना अहम है। शादी को मजाक बनाने वालों को तभी अक्ल आएगी। किसी के बेटे की हत्या कर रहे हैं। ये सब तभी रुकेंगे। इनमें से किसी को भी फांसी देकर मैं खुद को धन्य मानूंगा। फांसी चढ़ाना सबके बस की बात नहीं, जिगरा चाहिए पवन जल्लाद कहते हैं- किसी को फांसी के तख्ते पर लटकाना, इतना आसान काम नहीं। इंसान अपनी जिंदगी में एक चींटी भी नहीं मार सकता। यहां जिंदा आदमी को फांसी पर चढ़ाना है। इसके लिए जिगरा और हिम्मत चाहिए। केवल हाथों में ताकत होने से काम नहीं चलता, मन मजबूत होना चाहिए। तभी आप जल्लाद बन सकते हो। किसी को भी जब हम फांसी पर लटकाते हैं, तो हमें कोई डर या घबराहट नहीं होती। क्योंकि, ईश्वर ने हमें इसी काम के लिए चुना है। ऊपरवाले ने हमें इसके लिए दुनिया में भेजा है कि हम यहां पापियों का अंत करें। फांसी देते समय हमारे मन में बस यही होता है कि एक अपराध का आज हमारे हाथों अंत हो रहा है। क्या पुलिस के हाथ एनकाउंटर में कांपते हैं? डॉक्टर के हाथ पोस्टमॉर्टम या ऑपरेशन में कांपते हैं? फिर हमारे हाथ क्यों कांपेंगे? फांसी देने में गर्व महसूस होता है, हम अच्छा काम कर रहे फांसी देना तो अच्छा काम है। मुझे तो अपने इस काम पर गर्व होता है। लोग मुझे या मेरे परिवार को जल्लाद कहें, तो मुझे बुरा नहीं लगता। क्योंकि, हम तो अच्छा काम कर रहे हैं। खुशी की बात है कि हमें यह काम करने का मौका मिल रहा है। जैसे कानून, जज अपराधी को सजा सुनाते हैं। पुलिस अपराधी पकड़कर समाज की सुरक्षा करती है। ठीक वैसे ही हम जल्लाद उन अपराधियों को फांसी के तख्ते पर चढ़ाकर समाज को अपराधियों से मुक्ति दिलाते हैं। ये तो मेरे लिए गर्व का काम है। जब कभी फांसी पर लटकाया जाएगा, तो मुस्कान-रविता को मथुरा जेल के फांसीघर में लटकाया जाएगा। क्योंकि, महिलाओं को फांसी मथुरा जेल में दी जाती है। वहीं साहिल, अमरदीप को मेरठ जेल या यूपी की अन्य किसी भी जेल में फांसी पर लटकाया जा सकता है। जिस जेल का वारंट आएगा, उसी जेल में उनको फांसी पर लटकाया जाएगा। देश में अकेले जल्लाद हैं पवन, तीसरी पीढ़ी काम संभाल रही पवन जल्लाद ने बताया- मुझे फांसी लगाने का काम विरासत में मिला है। पहले मेरे दादा कल्लू जल्लाद फांसी देते थे। कल्लू जल्लाद से ये काम उनके बेटे मम्मू जल्लाद के पास आया। मम्मू जल्लाद ने ये काम अपनी तीसरी पीढ़ी में अपने बेटे यानी मुझे (पवन जल्लाद) सौंपा। अब मैं भी अपने बेटे को अपराधियों को फांसी चढ़ाने की तकनीक सिखा रहा हूं। जिससे, मेरे बाद यह काम मेरा बेटा ही देखे। पवन जल्लाद देश के इकलौते जल्लाद हैं। मेरठ के कांशीराम कॉलोनी में परिवार के साथ रहते हैं। परिवार में पत्नी, एक बेटा और 5 बेटियां हैं। पवन बताते हैं कि लखनऊ में एक जल्लाद और हैं, लेकिन वो कोरोना टाइम से ही बीमार चल रहे हैं। इसलिए हम अकेले जल्लाद हैं। हिंदुस्तान में कहीं भी फांसी हो, हमें ही फांसी के लिए बुलाया जाता है। फांसी देने में लगता है 15 मिनट का समय पवन जल्लाद ने बताया- एक अपराधी को फांसी पर लटकाने की पूरी प्रक्रिया करीब 15 मिनट की होती है। कैदी को फांसीघर में लाया जाता है। तब तक जल्लाद फांसी देने की पूरी तैयारी कर चुका होता है। फंदे से लेकर लीवर तक सब चेक कर चुका होता है। बंदी को फांसी के तख्ते पर लाने से पहले प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है। वो चाहे तो प्रार्थना कर सकता है। फिर उसे तख्ते पर लाया जाता है। यहां से जल्लाद का काम शुरू होता है। जल्लाद बंदी के चेहरे को कपड़े से ढंकता है। इसके बाद उसे फांसी के तख्ते पर खड़ा करता है। उसके गले में रस्सी का फंदा डालता है। जैसे ही फांसी की सजा की घंटी बजती है, तुरंत जल्लाद लीवर खींच देता है। लीवर खींचते ही गले में पड़ा फांसी का फंदा भी कसता है और कैदी के पैरों के नीचे बना लकड़ी का तख्ता खुलकर नीचे गिर जाता है। नीचे 15 फीट का गहरा गड्ढा होता है। इसी गहरे गड्डे में उसका शरीर लटका रहता है। गले में पड़े फंदे के कारण वो झूलने लगता है। तभी उसके गले की हड्डी दबाव से चटकती है और मौत हो जाती है। फांसी पर लटकाने के बाद क्या होता है? पवन जल्लाद ने बताया- फांसी पर लटकाने के बाद 30 मिनट का समय इंतजार का होता है। जिससे अपराधी की मौत हो जाए। इसके बाद जल्लाद अपराधी को फांसी के तख्ते पर लटकाए हुए ही चेक करता है कि वो मर चुका है या नहीं। जल्लाद के साथ ही डॉक्टर भी चेक करते हैं। फिर जल्लाद अपराधी की लाश के गले से फांसी का फंदा निकालता है। उसे फांसी के तख्ते से नीचे उतारता है। जेल स्टाफ की मदद से लाश को नीचे लाया जाता है। इसके बाद फांसी के रिकॉर्ड पर जल्लाद के दस्तख्त लिए जाते हैं। साथ ही जेल सुपरिंटेंडेंट, मजिस्ट्रेट के भी साइन होते हैं। तभी यह प्रमाणित होता है कि अपराधी को फांसी हो चुकी है। फांसी का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। इसके बाद अगर मृतक के घरवाले उसकी लाश को मांगते हैं, तो पूरी लिखा-पढ़ी के साथ लाश उसके घरवालों को अंतिम संस्कार के लिए दे दी जाती है। अगर घरवालों ने लाश नहीं मांगी, तो अंदर जेल में ही लाश को उसके धर्म के अनुसार दफनाकर या जलाकर अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। बोले- 10 हजार महीने के मिलते हैं, सरकार इसे बढ़ाए पवन जल्लाद ने कहा- यूपी में जल्लाद को एक फांसी पर 25 हजार रुपए मिलते हैं। लेकिन, फांसी बहुत कम होती है। मैंने पिछली फांसी दिल्ली के निर्भया कांड के 4 दोषियों को 2020 में दी थी। तिहाड़ जेल में इन चारों को मैंने फांसी पर लटकाया था। उसके बाद अब जाकर ये मौका मिलेगा। बीच में अमरोहा की शबनम को फांसी की सजा हुई, लेकिन अभी वो भी जेल में है। मेरठ की ये चारों फांसियां भी होंगी या नहीं, कह नहीं सकते। बड़ी मुश्किल से किसी जल्लाद को अपनी जिंदगी में किसी को फांसी चढ़ाने का मौका मिलता है। तब भी हमें ये 25 हजार रुपए मिलते हैं, वरना नहीं मिलते। बाकी हर महीने 10 हजार रुपए का वेतन मिलता है। इससे ज्यादा कोई सुविधा नहीं है। अब 10 हजार रुपए में गुजारा कैसे करें? सरकार को हमारा वेतन बढ़ाना चाहिए। ------------------------------ ये खबर भी पढ़िए- मेरठ सांप कांड-जज ने फैसले में 4 बड़ी हत्याएं गिनाईं, दामिनी, इल्मा, सोनम, सिया का नाम लिया मेरठ के सांप कांड में पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को 16 अक्टूबर को सजा-ए-मौत दी गई। जजमेंट में जज ने सिर्फ रविता केस का जिक्र नहीं किया। देश में सामने आए ऐसे कई मामलों को भी फैसले का हिस्सा बनाया, जिनमें प्रेम संबंधों के चलते पति की हत्या की साजिश पत्नी ने रची। पढ़ें पूरी खबर…
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