पाकिस्तान में गैस संकट चरम पर, लोग गुब्बारों में भरकर कर रहे खाना पकाने की जुगत
पाकिस्तान में गैस संकट इतना गहरा गया है कि लोग घरेलू रसोई गैस को गुब्बारों में भरकर उपयोग करने को मजबूर हैं। बढ़ती महंगाई और आपूर्ति की कमी ने आम जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 8 मई 2026
गैस संकट से बिगड़े हालात
पाकिस्तान में रसोई गैस की कमी अब गंभीर राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुकी है। शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है। कई जगहों पर लगातार घंटों और कई दिनों तक गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे आम जनता की दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है।
इस स्थिति के कारण घरों में खाना पकाने से लेकर छोटे-छोटे घरेलू कार्यों तक पर असर पड़ रहा है। लोग मजबूरी में लकड़ी, कोयला और अन्य अस्थायी साधनों पर निर्भर होने को मजबूर हैं, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
गैस आपूर्ति व्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार गैस सप्लाई चेन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो गई हैं, जिसके कारण वितरण प्रणाली पूरी तरह असंतुलित हो चुकी है। पाइपलाइन नेटवर्क पर दबाव बढ़ने के साथ-साथ गैस की नियमित आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।
कई क्षेत्रों में गैस वितरण के समय को सीमित कर दिया गया है, जिससे लोगों को केवल कुछ निश्चित घंटों में ही गैस मिल पा रही है। इससे विशेषकर कामकाजी वर्ग और मध्यमवर्गीय परिवारों की परेशानियां और अधिक बढ़ गई हैं।
गुब्बारों में गैस भरकर उपयोग
कुछ इलाकों में लोग मजबूरी में प्लास्टिक के गुब्बारों का इस्तेमाल अस्थायी गैस भंडारण के रूप में कर रहे हैं। उपलब्ध गैस को इन गुब्बारों में भरकर बाद में खाना पकाने के लिए उपयोग किया जा रहा है।
यह तरीका पूरी तरह असुरक्षित और खतरनाक माना जा रहा है, लेकिन गैस की भारी कमी और ऊंची कीमतों के कारण लोग इसे अपनाने को विवश हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि संकट कितना गंभीर हो चुका है।
सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा
ऊर्जा विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों ने इस प्रथा को अत्यंत जोखिमपूर्ण बताया है। प्लास्टिक के गुब्बारों में गैस भरने से किसी भी समय विस्फोट जैसी दुर्घटना हो सकती है।
थोड़ी सी गर्मी, चिंगारी या दबाव बढ़ने पर बड़ा हादसा होने की संभावना रहती है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यह खतरा और भी अधिक गंभीर हो जाता है।
गैस की बढ़ती कीमतें और कालाबाजारी
पाकिस्तान में घरेलू रसोई गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ और अधिक बढ़ गया है। कई क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं।
इसके साथ ही कालाबाजारी और कृत्रिम कमी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। कुछ स्थानों पर गैस को रोककर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है, जिससे बाजार में असंतुलन की स्थिति पैदा हो गई है।
आम जनता पर सामाजिक और आर्थिक असर
इस संकट का सीधा असर आम जनता के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर पड़ रहा है। कई परिवारों में भोजन की नियमित व्यवस्था प्रभावित हो गई है और रोजमर्रा के खर्चों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई, दफ्तर जाने वाले लोगों का समय और घरेलू व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। लगातार तनाव और अस्थिरता के कारण सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है।
पाकिस्तान में गैस संकट अब केवल एक ऊर्जा समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट बन चुका है। यदि समय रहते इस स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले समय में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है तथा जनजीवन को और अधिक प्रभावित कर सकती है।