पांचाल संग्रहालय में 5 हजार साल पुराने इतिहास के निशान:3 हजार साल पुरानी मूर्तियां और मुगलकालीन शिव प्रतिमा खास
बरेली के एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय स्थित पांचाल संग्रहालय रुहेलखंड की करीब 5 हजार साल पुरानी सभ्यता, संस्कृति और इतिहास को सहेजे हुए है। यहां रखे प्राचीन अवशेष क्षेत्र के गौरवशाली अतीत की झलक दिखाते हैं। संग्रहालय में करीब 3 हजार साल पुरानी मूर्तियां प्रमुख आकर्षण हैं। इन्हें देखने के लिए दूर-दूर से इतिहास प्रेमी और पर्यटक पहुंचते हैं। यहां मुगलकाल से जुड़ी भगवान शिव की एक अनूठी प्रतिमा भी है, जिसमें उन्हें गोलाकार दाढ़ी के साथ दिखाया गया है। यह प्रतिमा इतिहासकारों के लिए शोध का विषय बनी हुई है। प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की झलक पांचाल संग्रहालय में संरक्षित अवशेष रुहेलखंड और बरेली के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। यहां मौजूद प्राचीन मूर्तियां और अन्य सामग्री क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती हैं। संग्रहालय अतीत को समझने के साथ ही इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है। जरी-जरदोजी और कारचोबी की परंपरा भी संरक्षित संग्रहालय में स्थित ‘पं. सुरेंद्र मोहन मिश्र वीथिका’ बरेली के पारंपरिक हस्तशिल्प की पहचान को सामने लाती है। यहां प्रसिद्ध जरी-जरदोजी और कारचोबी के वस्त्रों के साथ चरखा, गोटे-पट्टी और कढ़ाई के नमूने प्रदर्शित किए गए हैं। इनके माध्यम से बरेली के हस्तशिल्प उद्योग की पुरानी परंपराओं और कलात्मक विरासत की जानकारी मिलती है। प्रवेश के लिए निर्धारित है शुल्क प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष विजय बहादुर सिंह यादव ने बताया कि संग्रहालय में प्रवेश के लिए शुल्क निर्धारित है। यहां संरक्षित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर रुहेलखंड के गौरवशाली अतीत को जानने का अवसर देती है।
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