प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में गूंजा ‘30 हजार दिनों’ का मंत्र:मोहनजी बोले- सफलता नहीं, संतुष्टि है जीवन की असली कमाई
आध्यात्मिक गुरु और मानवतावादी मोहनजी ने 2 अक्टूबर को अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के रॉबर्टसन हॉल में विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद किया। ‘तनाव और सफलता से परे : उद्देश्य और संतोष पर हिंदू ज्ञान’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने करियर, धन, तनाव और जीवन के उद्देश्य पर विचार साझा किए। प्रिंसटन के हिंदू जीवन कार्यक्रम के सहायक डीन डॉ. विनीत चंदर ने कहा कि विद्यार्थियों के सामने वास्तविक संतुष्टि और समाज में योगदान का सवाल महत्वपूर्ण है। मोहनजी ने कहा कि सफलता का वास्तविक अर्थ संतोष और परिपूर्णता है। व्यक्ति को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने बीते कल से तुलना करनी चाहिए। उन्होंने तनाव की जड़ स्वामित्व की भावना को बताते हुए आत्ममंथन और करुणा अपनाने की सलाह दी। बच्चों के करियर पर उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपनी अपेक्षाएं उन पर नहीं थोपनी चाहिए। उन्होंने युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता पहचानने के लिए समय देने पर जोर दिया। व्यवसाय में ईमानदारी को जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि केवल लाभ के बजाय सहयोग और साझेदारी महत्वपूर्ण हैं। मोहनजी ने युवाओं से धन के पीछे भागने के बजाय रचनात्मकता, संतुष्टि और जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर ध्यान देने की अपील की।
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