प्रयागराज के अलोपशंकरी मंदिर में भक्तों की लंबी लाइनें:नवरात्र के सातवें दिन सुबह से उमड़ी भीड़, श्रद्धालु ले रहे मां का आशीर्वाद

Oct 17, 2026 - 09:55
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प्रयागराज के अलोपशंकरी मंदिर में भक्तों की लंबी लाइनें:नवरात्र के सातवें दिन सुबह से उमड़ी भीड़, श्रद्धालु ले रहे मां का आशीर्वाद
शारदीय नवरात्र के सातवें दिन संगम नगरी प्रयागराज के मशहूर मां अलोपशंकरी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सातवें दिन मां के दर्शन के लिए सुबह तड़के (भोर) से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। पूरा मंदिर परिसर "जय माता दी" के जयकारों से गूंज उठा। अलोपशंकरी मंदिर की अपनी एक खास पहचान है। यहां किसी आम मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि फूलों से सजे एक झूले (पालने) की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहां देवी सती के दाहिने हाथ का पंजा गिरकर गायब (अलोप) हो गया था, इसलिए इस जगह का नाम अलोपशंकरी पड़ा। लोग यहां पूरी श्रद्धा के साथ आते हैं और नारियल, चुनरी, फूल और प्रसाद चढ़ाकर अपने परिवार के लिए सुख-शांति की दुआ मांगते हैं। सुबह चार बजे से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। हाथ में पूजा की थाली लिए लोग अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कतारों में महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और युवा सभी बड़े उत्साह के साथ खड़े थे। कई घंटों तक लाइन में खड़े रहने के बाद भी लोगों के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि मां के दर्शन की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। भीड़ को संभालते हुए व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। लोगों को आराम से दर्शन कराने के लिए लोहे की बैरिकेडिंग लगाई गई थी, ताकि लाइन में कोई धक्का-मुक्की न हो। मंदिर के अंदर और बाहर महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और कैमरों से पूरी निगरानी रखी जा रही थी। मंदिर के बाहर पूजा का सामान, नारियल और मिठाइयों की दुकानों पर भी दिनभर खूब रौनक रही। भोर से शुरू हुआ दर्शन का यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।

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