'रा‌वण चुनाव लड़ता तो भ्रष्टाचार को खत्म करता':रामलीला के कलाकार बोले- उसके हृदय में बसते थे श्रीराम, आज हरण नहीं अपहरण होता है

Oct 20, 2026 - 06:45
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'रा‌वण चुनाव लड़ता तो भ्रष्टाचार को खत्म करता':रामलीला के कलाकार बोले- उसके हृदय में बसते थे श्रीराम, आज हरण नहीं अपहरण होता है
दशहरे पर रावण का पुतला जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। लेकिन रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले कलाकार उसे सिर्फ खलनायक नहीं मानते। कानपुर में रावण का अभिनय करने वाले कलाकारों के लिए वह ज्ञानी भी है और अत्याचारी भी। कोई उसके भीतर श्रीराम के प्रति भक्ति देखता है, तो कोई उसके व्यक्तित्व के अच्छे और बुरे पहलुओं को सामने रखता है। कलाकारों से पूछा गया कि आज रावण चुनाव लड़ता तो क्या वादे करता और किसका हरण करता? किसी ने भ्रष्टाचारियों और आतंकवादियों का हरण करने की बात कही, तो किसी ने कहा कि आज हरण नहीं, अपहरण होता है। भ्रष्टाचार खत्म करने का वादा करता रावण कल्याणपुर स्थित आशा माता मंदिर की रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले सुभाष त्रिपाठी पिछले 25 साल से मंचन कर रहे हैं। उनका कहना है कि आज रावण चुनाव लड़ता तो पूरे विश्व को अपने वश में करने और भ्रष्टाचार खत्म करने का वादा करता। वह भ्रष्टाचारियों और आतंकवादियों का हरण करता। सुभाष के मुताबिक, रावण के व्यक्तित्व में उद्दंडता के साथ अच्छे विचार भी थे, लेकिन उसके जीवन में अत्याचार का पक्ष भी रहा। आज के दौर में रावण होता तो अत्याचार करता। उसके ज्ञान पर उन्होंने कहा- रावण ज्ञानी है, ज्ञानी रहेगा और ज्ञानी था। रावण के हृदय में भी बसते थे श्रीराम रेल बाजार की छावनी रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले पप्पू मिश्रा का कहना है कि रावण के हृदय में भी प्रभु श्रीराम का वास था। विभीषण को हीरो या विलेन मानने के सवाल पर उन्होंने उन्हें परमात्मा का परम भक्त बताया। उनके मुताबिक, विभीषण ने रावण की नाभि में अमृत कुंड होने का रहस्य बताया, जिससे उसके वध का रास्ता खुला। करीब 12 साल से रावण का अभिनय कर रहे पप्पू मिश्रा कहते हैं कि इस किरदार को निभाने के लिए भारी आवाज और दमदार संवाद ही काफी नहीं हैं। रामायण के पात्रों को समझना भी जरूरी है। उनके अनुसार, 18 पुराण, छह शास्त्र और चार वेदों की समझ रावण के चरित्र को मंच पर सही ढंग से उतारने में मदद करती है। सीता हरण के दृश्य पर पप्पू मिश्रा कहते हैं कि मंच पर वह रावण का अभिनय करते हैं, लेकिन श्रृंगार कक्ष में लौटने के बाद सीता उनकी मां और राम उनके पिता हैं। वह मानते हैं कि खलनायक के बिना नायक का किरदार भी पूरा नहीं होता। आज के दौर में हरण के सवाल पर उनका जवाब था, “आज हरण नहीं होता, सिर्फ अपहरण होता है।

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