राहुल गांधी ने अभिजीत दीपके को चाय पर बुलाया, फिर भी क्यों नहीं पहुंचे सीजेपी नेता

राहुल गांधी की ओर से विपक्षी नेताओं के लिए आयोजित चाय कार्यक्रम में कॉकरोच जनता पार्टी को भी आमंत्रित करने की कोशिश की गई। अभिजीत दीपके को निमंत्रण देने का प्रयास हुआ, लेकिन वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। यह घटनाक्रम सीजेपी के नेताओं की हिरासत और 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद सामने आया है।

Oct 15, 2026 - 10:37
Updated: 7 hours ago
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राहुल गांधी ने अभिजीत दीपके को चाय पर बुलाया, फिर भी क्यों नहीं पहुंचे सीजेपी नेता

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 अक्टूबर 2026

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके को अपने साथ चाय पर चर्चा के लिए आमंत्रित करने की कोशिश की है। बुधवार को विपक्षी दलों के नेताओं के लिए आयोजित विशेष चाय कार्यक्रम में कांग्रेस की ओर से सीजेपी को भी शामिल होने का न्योता दिया गया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सीजेपी के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म है। हालांकि, अभिजीत दीपके इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। इस घटनाक्रम को कांग्रेस और सीजेपी के बीच संभावित संवाद की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस ने सीजेपी को न्योता देने का फैसला क्यों लिया

कांग्रेस ने सीजेपी के नेताओं को राहुल गांधी के चाय कार्यक्रम में आमंत्रित करने का निर्णय ऐसे समय लिया, जब दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज थीं। समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार सुबह कांग्रेस के भीतर सीजेपी से संपर्क साधने और उसके नेताओं को कार्यक्रम में बुलाने पर विचार किया गया। इसके लिए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण से भी संपर्क साधने में मदद मांगी गई। कांग्रेस की इस पहल को सीजेपी के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है, हालांकि इससे दोनों दलों के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं होती।

अभिजीत दीपके ने निमंत्रण स्वीकार नहीं किया

कांग्रेस की ओर से अभिजीत दीपके तक पहुंचने की कोशिश की गई, लेकिन वह उस समय महाराष्ट्र में मौजूद थे। इसी दौरान सीजेपी के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास पुलिस की हिरासत में थे। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दीपके को राहुल गांधी के चाय कार्यक्रम के लिए संपर्क किया गया था, लेकिन वह इस निमंत्रण को लेकर विशेष उत्साह नहीं दिखा रहे थे। आखिरकार, वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। इस कारण कांग्रेस की पहल के बावजूद दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने बातचीत नहीं हो सकी।

सीजेपी को लेकर कांग्रेस के भीतर पहले से संदेह

सीजेपी के प्रति कांग्रेस के रुख में संभावित बदलाव की चर्चा के बावजूद पार्टी के भीतर उसके राजनीतिक स्वरूप को लेकर संदेह रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व का एक बड़ा हिस्सा सीजेपी को आम आदमी पार्टी से जुड़ा हुआ संगठन या उसके प्रभाव में काम करने वाला समूह मानता रहा है। सीजेपी का उदय मई में सामाजिक माध्यमों पर चर्चा के साथ हुआ था और बाद में उसने जून-जुलाई में जंतर-मंतर पर परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भी राजनीतिक दबाव बढ़ा था। हालांकि, सीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच किसी औपचारिक संबंध को लेकर इस रिपोर्ट में निर्णायक प्रमाण नहीं दिया गया है।

10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर कांग्रेस की नजर

सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। प्रदर्शन से पहले उसके नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। इस दौरान राजधानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती बरती। समाचार रिपोर्ट में बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने का भी उल्लेख है। इन कार्रवाइयों के कारण सीजेपी का प्रदर्शन उसकी घोषित योजना के मुताबिक नहीं हो सका।

प्रदर्शन के बाद सीजेपी की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा

कांग्रेस के आकलन के मुताबिक, 10 अक्टूबर को सीजेपी बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने में सफल नहीं रही। पार्टी के कुछ नेताओं की नजर जून-जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए उसके पिछले प्रदर्शनों से तुलना पर भी थी, जब परीक्षा प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। हालिया प्रदर्शन के दौरान नेताओं की हिरासत और सुरक्षा व्यवस्था ने आंदोलन के स्वरूप को प्रभावित किया। ऐसे माहौल में राहुल गांधी की ओर से सीजेपी को चाय कार्यक्रम में आमंत्रित करने की कोशिश को विपक्षी राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस पहल से कांग्रेस और सीजेपी के संबंधों में आगे कोई बड़ा बदलाव आएगा या नहीं।

आगे क्या हो सकता है

राहुल गांधी की ओर से सीजेपी को आमंत्रित करने की कोशिश विपक्षी दलों के बीच संवाद की संभावनाओं को सामने लाती है। लेकिन अभिजीत दीपके के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने से इस पहल का तत्काल कोई ठोस राजनीतिक परिणाम सामने नहीं आया। कांग्रेस के भीतर सीजेपी को लेकर मौजूद संदेह और सीजेपी के नेताओं पर हुई पुलिस कार्रवाई आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बन सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष भविष्य में बातचीत का कोई रास्ता निकालते हैं या उनके बीच दूरी बनी रहती है।

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