रामलीला में रामजन्म से ताड़का वध तक का मंचन:जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा मैदान, विश्वामित्र के साथ वन गए राम-लक्ष्मण

Oct 14, 2026 - 07:24
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रामलीला में रामजन्म से ताड़का वध तक का मंचन:जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा मैदान, विश्वामित्र के साथ वन गए राम-लक्ष्मण
बलरामपुर में श्रीश्री 108 सत्य प्रचारिणी रामलीला समिति की ओर से नगर में आयोजित रामलीला में भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर ताड़का वध तक के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय, प्रभावशाली संवादों और मनोहारी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामजन्म के प्रसंग के दौरान पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।रामलीला मंगलवार रात्रि देर रात 12:45 समाप्त हुआ। मंचन की शुरुआत महाराज दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्म के प्रसंग से हुई। अयोध्या में चारों राजकुमारों के जन्म की खुशी में बधाई गीतों और मधुर धुनों की प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से रामजन्म के उल्लास और अयोध्यावासियों की प्रसन्नता को जीवंत कर दिया। इस दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन का दृश्य प्रस्तुत किया गया। यज्ञ में राक्षसों द्वारा बाधा उत्पन्न किए जाने पर महर्षि विश्वामित्र ने महाराज दशरथ से राम और लक्ष्मण को अपने साथ भेजने का आग्रह किया। पुत्रमोह के कारण दशरथ पहले असमंजस में पड़े, लेकिन महर्षि वशिष्ठ के समझाने पर उन्होंने राम और लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ वन जाने की अनुमति दे दी। वन में पहुंचने के बाद भगवान श्रीराम द्वारा ताड़का वध का रोमांचक मंचन किया गया। ताड़का के प्रवेश के साथ ही दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई। गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए श्रीराम ने ताड़का का वध कर ऋषियों के यज्ञ की रक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। इसके बाद सुबाहु और ब्रज्यदंत वध के प्रसंगों का भी प्रभावशाली मंचन हुआ। राम-लक्ष्मण के शौर्य और पराक्रम को देखकर दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। रामलीला मंचन के दौरान अतिथियों के रूप में तुलसीपार्क समिति के संरक्षक एवं श्रीराम जन्मभूमि मामले के पक्षकार बाबू राजेंद्र सिंह, तुलसीपार्क समिति के अध्यक्ष प्रीत पाल सिंह, मंगल बाबू और रघुनाथ शुक्ला का समिति की ओर से अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया। रामलीला के प्रसंगों ने जहां दर्शकों को धार्मिक आस्था से जोड़ा, वहीं भगवान श्रीराम के आदर्शों, गुरु के प्रति सम्मान और धर्म की रक्षा का संदेश भी दिया।

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