रामलीला में सीता हरण, जटायु मरण और राम-हनुमान मिलन का मंचन
आदर्श रामलीला संस्थान की ओर से आयोजित रामलीला में सीता हरण, जटायु मरण, राम-हनुमान मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता प्रसंगों का मंचन किया गया। शुभारंभ आचार्य नवलकिशोर शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रामायण की पूजा करवाकर किया। संस्था के प्रेस प्रवक्ता चेतन बंसल ने बताया कि लीला की शुरुआत शूर्पणखा के अपने कटे हुए नाक-कान लेकर लंकापति रावण के पास पहुंचने से हुई। शूर्पणखा ने अपने साथ हुए अपमान की व्यथा सुनाते हुए रावण से बदला लेने की गुहार लगाई। उसने कहा, मेरी नाक कटी रावण, अब अपनी नाक बचा लो तुम, अब जरा शर्म बची हो तो बहना की लाज बचा लो तुम। बहन की व्यथा सुनकर रावण क्रोधित हो गया और उसने इस अपमान का बदला लेने का निश्चय किया। शूर्पणखा ने रावण को बताया कि अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण पंचवटी में रह रहे हैं। उनके साथ एक अत्यंत सुंदर स्त्री भी है। इसके बाद रावण ने सीता माता का हरण करने के लिए अपने मामा मारीच को सोने का मृग बनाकर पंचवटी भेजा। आगे की लीला में सीता हरण, जटायु के बलिदान, श्रीराम की हनुमान से भेंट और सुग्रीव से मित्रता के प्रसंगों का मंचन किया गया। रामलीला के समापन पर दर्शकों से संवाद करते हुए तीन प्रश्न पूछे गए। सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को संस्था की ओर से उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान संस्था अध्यक्ष वेदप्रकाश नागर और कार्यकर्ता शामिल रहे।
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