शामली जिला अस्पताल की रसोई का टेंडर विवादों में फंसा:14 में 11 फर्मों के आवेदन निरस्त, 3 को योग्य माना; सहारनपुर की फर्म ने आरोप लगाया

Oct 04, 2026 - 15:03
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शामली जिला अस्पताल की रसोई का टेंडर विवादों में फंसा:14 में 11 फर्मों के आवेदन निरस्त, 3 को योग्य माना; सहारनपुर की फर्म ने आरोप लगाया
शामली जिला अस्पताल में मरीजों के लिए रसोई शुरू होने से पहले ही टेंडर प्रक्रिया विवादों में आ गई है। सहारनपुर की एक फर्म ने तकनीकी योग्यता पूरी करने के बावजूद उसे नियमों के खिलाफ टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने का आरोप लगाया है। फर्म की शिकायत के बाद शनिवार को टेंडर नहीं खोला जा सका और प्रक्रिया रोक दी गई। फर्म संचालक शमीम खान ने जेम बिड सेल समिति, लखनऊ को शिकायत भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनकी फर्म ने जिला अस्पताल की रसोई के टेंडर के लिए आवेदन किया था। कुल 14 फर्मों ने टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, जिनमें से 11 को रद्द कर दिया गया और सिर्फ तीन फर्मों को तकनीकी रूप से योग्य माना गया। शमीम खान का दावा है कि उनकी फर्म ने टेंडर की सभी शर्तें पूरी की थीं और जरूरी दस्तावेज भी अपलोड किए गए थे। उनका कहना है कि उन्हें बताया गया कि जीएसटीआर की रसीद अपलोड नहीं हुई है, जबकि उनके अनुसार यह दस्तावेज पहले ही अपलोड किया जा चुका था। खान ने तकनीकी आपत्ति दूर करने का मौका देने की मांग की है। उनका आरोप है कि दस्तावेज पूरे होने के बावजूद उनकी फर्म को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। शिकायत के बाद टेंडर खोलने की प्रक्रिया रोकी गई शिकायत सामने आने के बाद शनिवार को जिला अस्पताल की रसोई के टेंडर खोलने की प्रक्रिया रोक दी गई। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक मनोज कुमार अखौरी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद टेंडर नहीं खोला गया है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ बोले- जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई सीएमओ डॉ. तृतीय कुमार सक्सेना ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं सदर एसडीएम सचिन राजपूत ने कहा कि मामला अभी उनकी जानकारी में नहीं है। मरीजों की रसोई शुरू होने से पहले प्रक्रिया पर उठे सवाल जिला अस्पताल में मरीजों के लिए रसोई शुरू किए जाने की प्रक्रिया के तहत टेंडर निकाला गया था। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में फर्म की शिकायत के बाद विवाद खड़ा हो गया है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तकनीकी दस्तावेजों को लेकर उठाई गई आपत्ति सही थी या नहीं और टेंडर प्रक्रिया आगे किस तरह बढ़ेगी।

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