शामली में 23 अक्टूबर को एमएलसी चुनाव के लिए वोटिंग:शिक्षक सीट पर 1619 और स्नातक सीट पर 4586 मतदाता करेंगे मतदान
शामली में मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीटों पर इस बार मुकाबला पुराने चुनावों से अलग है। शिक्षक सीट पर लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले ओमप्रकाश शर्मा और स्नातक सीट पर चार बार जीत दर्ज कर चुके हेम सिंह पुंडीर के चुनावी परिदृश्य से हटने के बाद सियासी समीकरण बदल गए हैं। अब भाजपा और सपा दोनों सीटों पर जीत के लिए पूरा जोर लगा रही हैं। एक महीने से बैठकें, संगठन की रणनीति और घर-घर जनसंपर्क के जरिए मतदाताओं को साधने की कोशिश की जा रही है। शामली जिले में 23 अक्टूबर को पांच केंद्रों पर मतदान होगा। यहां शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के 1619 और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के 4586 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। भाजपा ने शिक्षक सीट पर श्रीचंद शर्मा और स्नातक सीट पर दिनेश गोयल को मैदान में उतारा है। वहीं, सपा ने शिक्षक सीट पर नितिन कुमार तोमर और स्नातक सीट पर प्रमेन्द्र सिंह भाटी पर भरोसा जताया है। शिक्षक सीट पर आठ निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं। इनमें कुलदीप मलिक, तनुज गंभीर, पंकज कुमार, बाकिर हुसैन, स्वराज पाल, सुशील, डॉ. सुशील कुमार पुंडीर और हरकेश सिंह शामिल हैं। ऐसे में मुकाबले में राजनीतिक दलों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों की सक्रियता भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। 2020 में भाजपा ने दोनों सीटों पर किया था कब्जा पिछले चुनाव में भाजपा ने दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर सियासी बढ़त बनाई थी। शिक्षक सीट पर श्रीचंद शर्मा ने ओमप्रकाश शर्मा को हराया था, जबकि स्नातक सीट पर दिनेश गोयल ने हेम सिंह पुंडीर को पराजित किया था। इस बार पुराने दिग्गजों की गैरमौजूदगी में भाजपा के सामने अपनी पिछली जीत दोहराने की चुनौती है। वहीं, सपा इन सीटों पर जीत दर्ज कर पश्चिमी यूपी में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाना चाहती है। शिक्षक संगठनों के रुख पर भी नजर चुनाव में शिक्षक संगठनों की भूमिका अहम मानी जा रही है। माध्यमिक शिक्षक संघ के सुशील पुंडीर के अनुसार, संगठन ने विरासत और अनुभव के साथ नए चेहरे पर दांव लगाया है। संगठन की कोशिश अपने पुराने वोट बैंक को एकजुट रखने की है। ऐसे में शिक्षक संगठनों का समर्थन और
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