शिक्षिका सलमा खान की प्रेरक कहानी:बोलीं- बच्चों को रटाने के बजाय प्रतिभा निखारने पर जोर, राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 से सम्मानित

Oct 06, 2026 - 16:51
0
शिक्षिका सलमा खान की प्रेरक कहानी:बोलीं- बच्चों को रटाने के बजाय प्रतिभा निखारने पर जोर, राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 से सम्मानित
बलरामपुर में बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर उनकी प्रतिभा और रुचियों को पहचानने वाली कंपोजिट विद्यालय आदर्श नगर की प्रभारी प्रधानाध्यापक सलमा खान को राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया गया है। शिक्षा में नवाचार, गतिविधि आधारित शिक्षण और बच्चों की प्रतिभाओं को मंच देने के उनके प्रयासों को इस सम्मान के लिए आधार बनाया गया। सलमा खान की शिक्षण यात्रा दिसंबर 2008 में शिक्षा क्षेत्र बलरामपुर के प्राथमिक विद्यालय बिजलीपुर प्रथम से सहायक अध्यापक के रूप में शुरू हुई। शुरुआत से ही उन्होंने पारंपरिक शिक्षण पद्धति के बजाय बच्चों को रोचक और गतिविधि आधारित तरीके से पढ़ाने पर जोर दिया। उनका मानना रहा कि सीखने की प्रक्रिया में बच्चों की भागीदारी बढ़ने से शिक्षा उनके लिए बोझ के बजाय आनंद और खोज का माध्यम बनती है। वर्ष 2011 में उनका स्थानांतरण ग्रामीण क्षेत्र से नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय प्राचीन में हुआ। इसके बाद 2014 में पदोन्नति के बाद उन्होंने उच्च प्राथमिक विद्यालय आदर्श में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यभार संभाला। विज्ञान, रचनात्मकता और खेल प्रतिभा पर दिया जोर सलमा खान ने बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियों के साथ उनकी रचनात्मकता, वैज्ञानिक सोच, खेल प्रतिभा और अन्य क्षमताओं को पहचानने पर भी विशेष ध्यान दिया। उनका प्रयास रहा कि बच्चों को केवल परीक्षा और अंकों के नजरिए से न देखा जाए, बल्कि उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर दिए जाएं। विज्ञान में रुचि रखने वाले बच्चों को प्रयोग और नवाचार के अवसर मिले, जबकि रचनात्मक प्रतिभा वाले विद्यार्थियों को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने के लिए मंच दिया गया। खेल में रुचि रखने वाले बच्चों को भी आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए गए। जनपद से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे विद्यार्थी इन प्रयासों के परिणामस्वरूप विद्यालय के कई विद्यार्थियों को जनपद, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। सलमा खान का मानना है कि शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह बच्चों के भविष्य का मार्गदर्शक भी होता है। विद्यालय में गतिविधियों और प्रयोगों को बनाया केंद्र कंपोजिट विद्यालय आदर्श नगर में प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ विद्यालय की शैक्षिक गतिविधियों को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उनके नेतृत्व में गतिविधियों, प्रयोगों, रचनात्मक कार्यों और बच्चों की सहभागिता को बढ़ाने के प्रयास किए गए। उनकी कार्यशैली का उद्देश्य ऐसा विद्यालय तैयार करना रहा, जहां बच्चे केवल पढ़ें नहीं, बल्कि सीखें, सोचें, सवाल करें, प्रयोग करें और अपनी प्रतिभा को पहचान सकें। एआरपी के रूप में शिक्षकों को भी दिया अकादमिक सहयोग सलमा खान का योगदान अपने विद्यालय तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन) के रूप में नगर क्षेत्र बलरामपुर में शिक्षकों को अकादमिक सहयोग देने और शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने में भूमिका निभाई। अपने अनुभव और अभिनव शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने अन्य शिक्षकों को भी बेहतर शिक्षण के लिए प्रेरित किया। वर्तमान में वह नोडल शिक्षण संकुल एवं ब्लॉक नोडल मीना मंच के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User