शिव धनुष टूटते ही रामलीला मैदान में गूंजा 'जय श्रीराम':सिया ने पहनाई रघुवीर को जयमाला, किन्नर समाज ने उतारी प्रभु श्रीराम की प्रथम आरती

Oct 05, 2026 - 07:30
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शिव धनुष टूटते ही रामलीला मैदान में गूंजा 'जय श्रीराम':सिया ने पहनाई रघुवीर को जयमाला, किन्नर समाज ने उतारी प्रभु श्रीराम की प्रथम आरती
आगरा के रामलीला मैदान में रविवार को सीता स्वयंवर का प्रसंग जीवंत हो उठा। पुष्प वाटिका में श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन से लेकर शिव धनुष भंग और जयमाला तक के दृश्यों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्रीराम ने गुरु को प्रणाम किया और शिव धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई तो धनुष टूटने की आवाज के साथ पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद माता सीता ने रघुवीर के गले में जयमाला पहनाई। विशाल मंच, एलईडी स्क्रीन, आधुनिक रोशनी और ध्वनि प्रभावों ने जनकपुरी का दृश्य सजीव कर दिया। लीला के दौरान किन्नर समाज की चांदनी और प्रीति ने प्रभु श्रीराम की प्रथम आरती उतारी। श्री रामलीला महोत्सव के पांचवें दिन मंचन का शुभारंभ विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक बड़े दिनेश जी, केशव धाम, प्रांत संगठन मंत्री राजेश कुमार, वृंदावन के मंत्री सतीश जी और ज्वाइंट कमिश्नर जीएसटी पल्लव सक्सेना ने स्वरूपों को माला अर्पित कर किया। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक बड़े दिनेश जी ने कहा कि श्रीराम के चरित्र को जीवन में उतारना ही रामचरितमानस का वास्तविक मर्म है। उन्होंने कहा कि रामलीला मंचन की शुरुआत सर्वप्रथम तुलसीदास जी ने की थी। ताड़का वध और अहिल्या उद्धार का मंचन लीला की शुरुआत मुनि विश्वामित्र के राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा के लिए मांगने के प्रसंग से हुई। दोनों राजकुमार मुनि के साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैं। रास्ते में ताड़का का वध कर श्रीराम अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देते हैं। इसके बाद यज्ञ की पूर्णाहुति और अहिल्या उद्धार का प्रसंग मंचित हुआ। शिला रूप में पड़ी गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या को प्रभु श्रीराम के चरण स्पर्श से मुक्ति मिली। इस दृश्य ने दर्शकों को प्रभु के करुणामय स्वरूप का भाव कराया। पुष्प वाटिका में मिले राम-जानकी इसके बाद जनकपुरी की पुष्प वाटिका का दृश्य मंच पर साकार हुआ। माता सीता अपनी सखियों के साथ फूल चुनने पहुंचीं। वहीं मुनि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण भी वाटिका में आए। पहली बार दोनों की नजरें मिलीं तो मंच पर प्रेम और भक्ति का भाव छा गया। एलईडी स्क्रीन पर जनकपुरी, फूलों से सजी वाटिका और रंग-बिरंगी रोशनी ने त्रेता युग का दृश्य रच दिया। इसके बाद माता सीता मां अम्बिका के मंदिर पहुंचीं। विधि-विधान से पूजा कर उन्होंने प्रभु श्रीराम को वर रूप में पाने की कामना की। मां अम्बिका ने उन्हें आशीर्वाद दिया। गौरा पूजन के इस प्रसंग पर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। गुरु को प्रणाम कर श्रीराम ने उठाया शिव धनुष सीता स्वयंवर में विभिन्न राज्यों के राजा पहुंचे। राजा जनक के दरबार में रखे भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने के लिए एक-एक कर राजाओं ने प्रयास किया, लेकिन कोई उसे हिला तक नहीं सका। इसके बाद मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम ने गुरु को प्रणाम किया और सहजता से धनुष उठा लिया। प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष भंग हो गया। विशेष रोशनी और ध्वनि प्रभावों से मंच पर बिजली जैसी चमक दिखाई गई। धनुष टूटते ही पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद मंगल गीतों के बीच माता सीता ने श्रीराम के गले में जयमाला पहनाई। वरमाला के समय कोल्ड आतिशबाजी की गई। मंच पर गूंजे मंगल गीत और जयकारों ने स्वयंवर के दृश्य को उत्सव में बदल दिया। बारहद्वारी से निकली राम-लक्ष्मण और जानकी की सवारी लीला से पहले लाला चन्नोमल की बारहद्वारी से मुनि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण घोड़ों पर सवार होकर निकले। माता जानकी चार सखियों के साथ रथ पर विराजमान थीं। सवारी रावतपाड़ा, जौहरी बाजार और बिजलीघर होते हुए रामलीला मैदान में बनी जनकपुरी पहुंची। रास्ते में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वरूपों का स्वागत किया। किन्नर समाज ने उतारी प्रभु श्रीराम की प्रथम आरती श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि आयोजन में किन्नर समाज द्वारा प्रभु श्रीराम की प्रथम आरती उतारने की परंपरा निभाई गई। किन्नर समाज की चांदनी और प्रीति ने समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए आरती की। लोकमान्यता के अनुसार, वनवास के समय श्रीराम ने अयोध्या के स्त्री-पुरुषों को वापस लौटने के लिए कहा था, लेकिन किन्नर समाज वहीं ठहर गया। वनवास से लौटने पर प्रभु श्रीराम ने उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया। इसी परंपरा की स्मृति में किन्नर समाज द्वारा आरती की जाती है। आज अयोध्या नगरी में होगा मेहंदी उत्सव रामलीला कमेटी के मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि सोमवार 5 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे प्रभु श्रीराम अपने अनुजों के साथ राजा दशरथ स्वरूप संजय सिंघल सादाबाद और रानी कौशल्या नीता सिंघल के निमंत्रण पर अग्रवन वाटर वर्क्स में बनी अयोध्या नगरी पहुंचेंगे। यहां राम विवाह के उपलक्ष्य में भव्य मेहंदी उत्सव आयोजित किया जाएगा। इसके लिए राजा दशरथ के परिवार की ओर से विशेष तैयारियां की गई हैं। लीला के दौरान कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, ताराचंद अग्रवाल, भगवान दास बंसल, मुकेश जौहरी, टीएन अग्रवाल, विनोद जौहरी, मनोज अग्रवाल, अंजुल बंसल, संजय तिवारी, आनंद मंगल, विष्णु दयाल, विजय प्रकाश गोयल, मीडिया प्रभारी राहुल गौतम, अजय अग्रवाल, रामांशू शर्मा, विकास अग्रवाल, शैलेश अग्रवाल, शालू अग्रवाल, राहुल शर्मा, आयुष अग्रवाल, मोहित गोयल, लखन अग्रवाल, प्रकाश चंद्र

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