श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन:लखनऊ में पुंडरीक महाराज ने गोवर्धन प्रसंग सुनाया, गुरुकुलों के संरक्षण पर चर्चा
लखनऊ में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन पुंडरीक गोस्वामी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी और गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन किया। ‘राधा रमण हरि बोल... हरि बोल’ के संकीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। हजारों श्रद्धालु तालियों और जयकारों के साथ भक्ति में लीन रहे। कथा व्यास मन माधव गौड़ेश्वर वैष्णवाचार्य पुंडरीक गोस्वामी महाराज ने संकीर्तन के साथ कथा की शुरुआत की। श्रद्धालुओं ने ‘राधा रमण लाल की जय’ और ‘राधा बल्लभ लाल की जय’ के जयकारे लगाए। पुंडरीक गोस्वामी महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए माखन चोरी और गोवर्धन लीला के प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि भगवान की बाल लीलाओं में वात्सल्य, करुणा और भक्तों के प्रति प्रेम का भाव दिखाई देता है। भारतीय संस्कृति की मूल शक्ति आध्यात्मिक परंपराओं में निहित पुंडरीक महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल शक्ति संस्कार और आध्यात्मिक परंपराओं में निहित है। सनातन संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने के लिए गुरुकुलों का संरक्षण और संवर्धन जरूरी है। देश में गुरुकुल व्यवस्था की आज भी जरूरत है। पुंडरीक गोस्वामी ने कहा कि गुरुकुलों के जरिए बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और भारतीय संस्कृति से जोड़ा जा सकता है। अयोध्या धाम के संत महंत डॉ. स्वामी भरत दास महाराज गुरुकुल व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं और उसे व्यवस्थित एवं संस्कारित रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन समाज को पुराने और स्थापित गुरुकुलों के संरक्षण के लिए स्वतंत्र संस्था के गठन पर विचार करना चाहिए। अभिभावक बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ कुछ समय गुरुकुल में भी भेजें, ताकि उन्हें भारतीय संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा मिल सके। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए अयोध्या धाम के संत एवं रानोपाली स्थित उदासीन संगत ऋषि आश्रम के पीठाधीश्वर महंत डॉ. स्वामी भरत दास महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में ज्ञान, भक्ति और कर्म तीनों का विशेष महत्व है। कथा में विधायक नीरज बोरा समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)