श्रीराम ने जयंत को दंड देकर किया उद्धार:बाराबंकी के दशहराबाग की रामलीला में जयंत प्रसंग का मंचन
बाराबंकी के दशहराबाग में जयंत प्रसंग का मंचन हुआ। श्रीराम ने कुटिलता को दंड और शरणागत की रक्षा का संदेश दिया। कलाकारों ने श्रीराम की मर्यादा, न्याय और करुणा को जीवंत किया। रामलीला का शुभारंभ सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुआ। प्रमोद पाठक ने मानस की चौपाइयों से लीला का वर्णन किया। मंचन में दिखाया गया कि चित्रकूट पर्वत पर इंद्रपुत्र जयंत ने कौवे का रूप धर माता सीता के चरणों में चोंच मारकर उन्हें घायल कर दिया। सीता को चोट पहुंचाने पर श्रीराम ने कुश को अभिमंत्रित कर जयंत की ओर छोड़ा। उस शक्ति से बचने जयंत तीनों लोकों में भटका, पर उसे कहीं शरण नहीं मिली। नारद मुनि की प्रेरणा से जयंत वापस श्रीराम की शरण में पहुंचा। प्रभु ने उसे एक आंख से वंचित कर माफ किया। यह प्रसंग बताता है कि दंड जरूरी है, पर शरणागत को माफ करना भी मर्यादा है। इसके बाद श्रीराम महर्षि अत्रि और माता अनुसुइया से मिले। अनुसुइया ने सीता को पतिव्रत धर्म सिखाया। वन मार्ग में विराध राक्षस से सामना भी दिखाया गया। लीला देखने बड़ी संख्या में दर्शक जुटे। इस दौरान लीला व्यास प्रमोद पाठक, समिति प्रबंधक रामलखन श्रीवास्तव, शिव कुमार वर्मा, अध्यक्ष अनिल अग्रवाल, विनय सिंह, शैलेंद्र सिंह, अंकित गुप्ता गोलू, राजू पटेल, राजेश गुप्ता कृष्णा, राकेश वर्मा और अक्षत सहित कई लोग मौजूद थे।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)