संभल हिंसा: आरोपी मुल्ला अफरोज पेशी पर नहीं पहुंचा:वकील ने तबीयत खराब का प्रार्थना पत्र दिया, 9 को पेश नहीं होने पर NBW जारी होगा
संभल हिंसा के आरोपी मुल्ला अफरोज एवं गुलाम की जिला न्यायालय में पेशी होनी थी। बीती 01 अक्टूबर क़ो मुल्ला अफरोज का स्थगन पत्र आने के बाद अंतिम अवसर देते हुए 05 अक्टूबर की तिथि समय के लिए नियत की गई थी, लेकिन आज भी आज भी मुल्ला अफरोज पेश नहीं हुआ है, जिसके बाद न्यायालय इस मामले में 9 अक्टूबर की तिथि नियत की है। सोमवार की दोपहर 01 बजे ज़िला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि बिलाल हत्याकांड मामले में धारा 351 BNS (313 CRPC) की सुनवाई होनी है, इसमें मुल्ला अफरोज एवं गुलाम आरोपी है। मुल्ला अफरोज के अधिवक्ता आसिफ अख्तर ने जिला न्यायालय में तबीयत खराब होने का प्रार्थना पत्र दिया है। जिला न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में इस मामले की सुनवाई चल रही है। राहुल दीक्षित ने बताया कि जिला कोर्ट ने 9 अक्टूबर के तिथि नियत करते हुए अंतिम मौका दिया है और पेश नहीं होने पर NBW जारी करने की चेतावनी दी है। सरकारी वकील ने बताया कि बीती 1 अक्टूबर को भी मुल्ला अफ़रोज़ की ओर से आए स्थगन प्रार्थना पत्र हमने आपत्ति की थी, उसमें 05 अक्टूबर कल की डेट लगी थी, जिसमें 351 की कार्यवाही इन दोनों मुलजिमानों के खिलाफ होगी। मुल्ला अफरोज के वकील आसिफ अख्तर ने स्थगन प्रार्थना पत्र दिया था, टाइम को आगे बढ़ाने के लिए लगातार उन्होंने प्रयास किया कि इस पत्रावली में साक्ष्य पूर्ण न हो। उन्होंने बताया कि पहले भी स्थगन पत्र दिए गए हैं लेकिन कल सुनवाई के दौरान अगर कोई स्थगन पत्र दिया जाता है तो हम न्यायालय में डे-बाय-डे के लिए हम प्रार्थना करेंगे और इस पत्रावली को जल्द से जल्द पूरा कराने का प्रयास करेंगे। राहुल दीक्षित ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वमान्य है, लेकिन NSA रद्द होने से मुल्ला अफरोज यह न समझें कि वह बच गया है, उसके खिलाफ मजबूत साक्ष्य है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा NSA रद्द करने के बाद जिला न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में मुल्ला अफरोज की पहली बार पेशी हो रहीं है। संभल हिंसा के बारे में जानिए 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ और दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर 2024 को किया गया, इस दौरान हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए और हिंसा भड़क गई, पुलिस पर पथराव-फायरिंग की गई, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। एसपी कृष्ण बिश्नोई, चर्चित ASP अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क एवं सपा विधायक इक़बाल महमूद के बेटे सुहैल इक़बाल सहित कई लोगों को नामजद करते 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया, हालांकि चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर विधायक पुत्र का नाम निकाल दिया गया। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 158 अभियुक्तों को जेल भेजा गया, जिसमें 3 महिलाएं और संभल हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस एवं गुलाम भी शामिल है। मुल्ला अफरोज पर अक्टूबर 2025 में रासुका लगी, इसके बाद अब वारिस और गुलाम पर भी रासुका की कार्रवाई की गई है। वहीं शारिक साठा के खिलाफ रेड कॉर्नर लुक आउट नोटिस जारी हो चुका है। बीती 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला दिया है। NSA क़ो रद्द करते हुए यूपी सरकार पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है साथ ही आदेश दिया है कि आदेश के 1 महीने के भीतर याचिकाकर्ता क़ो मुआवजे की रकम देनी होगी। साथ ही उसके विरुद्ध कोई अगर कोई अन्य आपराधिक मामला नहीं है तो उसे रिहा करने के भी आदेश दिए है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जफर अली को बीती 1 अगस्त 2025 को मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया था, 24 मार्च को उन्हें जेल भेजा गया था और 131 दिन के बाद जेल से बाहर आए थे। आपको बता दे कि काफी अभियुक्त की जमानत इलाहाबाद हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट से हो चुकी है।
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