स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:अतीत बीत चुका है और भविष्य अभी आया नहीं है; सुखी जीवन के लिए वर्तमान में ध्यान रखें 8 बातें
अतीत हमारी स्मृतियों में और भविष्य हमारी कल्पनाओं में रहता है, जबकि वर्तमान ही वह वास्तविकता है, जिसमें जीवन घटित हो रहा है। हमारा मन कभी बीती हुई घटनाओं की स्मृतियों में उलझा रहता है, तो कभी भविष्य की योजनाओं और आशंकाओं में खोया रहता है। इस कारण वह वर्तमान में टिक नहीं पाता। वास्तव में वर्तमान में जीना ही जीवन है। वर्तमान से जुड़ी ये बातें ध्यान रखेंगे, जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी… 1. वर्तमान ही वास्तविकता है, अतीत बीत चुका है और भविष्य अभी आया नहीं है। हमारे पास केवल वर्तमान है, जिसमें हम जीवन का अनुभव कर सकते हैं। 2. मन का स्वभाव भटकना है। मन कभी पुरानी स्मृतियों में उलझता है, तो कभी भविष्य की कल्पनाओं में खो जाता है। उसे वर्तमान में स्थिर करना चाहिए। 3. अतीत से सीखें, उसमें उलझें नहीं। बीती घटनाओं से अनुभव मिलता है, लेकिन बार-बार भूतकाल का स्मरण करने से मानसिक तनाव और दुख बढ़ता है। 4. भविष्य की चिंता से बचें। भविष्य के लिए योजना बनाना जरूरी है, लेकिन भविष्य की चिंता में वर्तमान को खराब नहीं करना चाहिए। 5. सतर्क रहें। अपने विचारों, भावनाओं और कार्यों के प्रति सतर्क रहकर हम स्वयं को बेहतर बना सकते हैं। 6. वर्तमान में रहने से व्यक्ति अपने विचारों को ठीक से समझ पाता है और अपने वास्तविक अस्तित्व को समझने लगता है। 7. कर्म पर ध्यान दें। परिणामों की चिंता करने के बजाय वर्तमान में किए जा रहे कार्य को पूरी ईमानदारी और एकाग्रता से करना चाहिए। 8. वर्तमान को सकारात्मकता के साथ स्वीकार करने से अनावश्यक चिंताएं कम होती हैं और मन की शांति मिलती है। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर दिए गए फोटो पर क्लिक करें।
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