तेंदुए के डर से स्कूल नहीं जा रहे बच्चे:लखीमपुर में रातभर रखवाली कर रहे लोग; 2 मासूमों को घर से उठा ले गया था
शाम ढलते ही घरों के दरवाजे बंद होने लगते हैं। खेत जाने वाले रास्तों पर सन्नाटा है। जिन बच्चों के हाथों में स्कूल बैग होता था, उनमें से कई घरों में कैद हैं। माता-पिता को डर है कि स्कूल आते-जाते समय खेत से निकलकर तेंदुआ हमला कर देगा। स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 42% तक कम हो गई है। यह हालात हैं लखीमपुर के 20 से ज्यादा गांवों में, जहां पिछले 48 घंटे में तेंदुए के हमले से 2 मासूमों की मौत हो गई। लोग रात-रातभर जागकर रखवाली कर रहे हैं। लाठी-डंडे लेकर झुंड में खेत जा रहे हैं। बच्चे अगर स्कूल जाते हैं, तो ग्रुप में शोर मचाते हुए जाते हैं। जंगल से गांव आने वाले रास्तों पर सुरक्षा खाई बनाई गई है। दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से करीब 75 किलोमीटर दूर उत्तर निघासन वन रेंज के गांवों में पहुंची। स्कूलों, खेतों और घरों में जाकर लोगों से बातचीत की। वन विभाग ने 10 महीने में 17 तेंदुए पकड़े, लेकिन इनका आतंक कम नहीं हो रहा। लोगों में खौफ है कि अगला शिकार कौन होगा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… दो दिन में 2 मासूम बच्चों को शिकार बनाया 12 अक्टूबर को धौरहरा वन रेंज के बोझिया गांव में 7 साल की सान्या को तेंदुआ घर के आंगन से उठा ले गया था। अगले दिन उसका अधखाया शव मिला था। इसके बाद 14 अक्टूबर की शाम, उत्तर निघासन वन रेंज के टॉपर फार्म में घर के बाहर खेल रहे 6 साल के मनजोत सिंह को तेंदुआ उठा ले गया। ढाई घंटे की तलाश के बाद जंगल से उसका अधखाया शव मिला। पिता जोगा सिंह ने बताया कि बेटे की मौत को 3 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक तेंदुए को पकड़ा नहीं जा सका। उन्हें अब तक न तो कोई मुआवजा मिला है और न ही घर के आसपास सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल बनाई गई। परिवार को डर है कि कहीं दूसरा बच्चा भी तेंदुए का शिकार न बन जाए। पिता बोला- मेरी आंखों के सामने से बेटी को उठा लिया सान्या के पिता संपत गिरि रहते हैं- खेत की तरफ से तेंदुआ आया। मेरी आंखों के सामने आंगन से बेटी को झपटकर पकड़ लिया। मैं पीछे दौड़ा, लेकिन तेंदुआ बच्ची को लेकर खेतों में भाग गया। रातभर ढूंढते रहे, लेकिन बच्ची को बचा नहीं पाए। संपत की पड़ोसी राधिका ने बताया- मैं बाहर ही बैठी थी। मेरे सामने से बच्ची को तेंदुआ ले गया। हम 4 लोग पीछे भागे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अगले दिन बच्ची का केवल धड़, पैर और सिर का थोड़ा सा हिस्सा ही मिला, बाकी अंग तेंदुए ने खा लिए थे। घटना के बाद राधिका खौफ में हैं। वह बात करते हुए रोने लगती हैं। जंगल से निकलकर आबादी के पास पहुंच रहे दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों से निकलकर बाघ और तेंदुए आबादी के करीब पहुंच रहे हैं। जंगल से सटे गांवों के आसपास गन्ने के खेतों में इनकी मौजूदगी है। निघासन तहसील क्षेत्र में जनवरी से अब तक तेंदुए और बाघ के हमलों में 7 लोगों की जान जा चुकी है। वन विभाग ने पिछले 10 महीने में अलग-अलग गांवों में पिंजरे लगाकर 17 तेंदुए पकड़े हैं। इसके बावजूद हमले नहीं रुक रहे। हालात ये हैं कि किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं। बच्चों की रखवाली के लिए लोग लाठी-डंडे लेकर घरों के बाहर बैठे हैं। गांव के बाहर रास्तों में खाई बनाई गई है। तेंदुए के हमलों का सबसे बुरा असर उन बच्चों पर पड़ रहा, जिनके स्कूल जंगल और गन्ने के खेतों के पास हैं। हमने स्कूल में टीचरों से बात की, तो पता चला कि परिजन बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। ऐली में 102 में से सिर्फ 59 बच्चे पहुंचे प्राथमिक स्कूल ऐली में स्थिति और भी चिंताजनक दिखी। प्रिंसिपल योगेश पांडेय ने बताया- स्कूल में कुल 102 बच्चे रजिस्टर्ड हैं, लेकिन केवल 59 बच्चे ही स्कूल पहुंचे। यानी करीब 42% बच्चे अनुपस्थित रहे। टीचरों के मुताबिक, तेंदुए की दहशत के चलते अभिभावक बच्चों को घर पर ही रख रहे हैं। नौबना में प्रिंसिपल बोले- डर है, पर ड्यूटी तो करनी है नौबना गांव के संविलियन स्कूल के प्रिंसिपल तालेवर सिंह ने बताया- स्कूल में कुल 103 बच्चे रजिस्टर्ड हैं। इनमें से केवल 71 बच्चे ही स्कूल पहुंचे। बच्चे तो बच्चे हैं, हम खुद गन्ने और जंगल वाले रास्तों से होकर स्कूल आते हैं। डर लगता है कि पता नहीं कब तेंदुआ हमला कर दे? लेकिन, ड्यूटी करनी है और बच्चों को पढ़ाना भी जरूरी है। बथुआ में 400 में से केवल 250 बच्चे पहुंचे जंगल से सटे प्राथमिक स्कूल बथुआ के प्रिंसिपल डीएस राणा ने बताया कि उनके स्कूल में 400 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। लेकिन, केवल 250 बच्चे ही आ रहे। पड़ोसी गांव प्रधान पुरवा के कई बच्चे तो स्कूल आ ही नहीं रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां के बच्चों और टीचरों का कई बार आते-जाते समय बाघ और तेंदुए से सामना हो चुका है। शुरुआत में बहुत डर लगता था, लेकिन पढ़ाना मजबूरी है। बच्चों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने स्कूल के सामने वायर फेंसिंग लगाई थी। उसे हाथियों ने कई जगह से तोड़ दिया है। अब इस टूटी हुई फेंसिंग की वजह से सुरक्षा व्यवस्था ठप हो गई है। मटहिया में 207 में से 172 बच्चे पहुंचे संविलियन स्कूल मटहिया के टीचर अवधेश कुमार ने बताया कि स्कूल में कुल 207 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से केवल 172 बच्चे ही उपस्थित हैं। स्कूल आने-जाने के लिए बच्चों और शिक्षकों को गन्ने के खेतों के पास से गुजरना पड़ता है। वहां हमले की आशंका हमेशा बनी रहती है। इसके बावजूद टीचर अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए जोखिम उठाकर स्कूल पहुंच रहे हैं। वहीं, नौरंगाबाद गांव के संविलियन स्कूल के प्रिंसिपल सुधीर ने बताया कि स्कूल में कुल 357 बच्चे हैं। तेंदुए के खौफ के चलते कम बच्चे आ रहे हैं। फरदहिया, 359 बच्चों वाले स्कूल में उपस्थिति घटी संविलियन स्कूल फरदहिया के प्रिंसिपल बलविंदर सिंह ने बताया कि स्कूल में कुल 359 बच्चे पढ़ते हैं। तेंदुए की दहशत के कारण उपस्थिति में करीब 4% की गिरावट आई है। गांववाले रातभर जागकर रखवाली कर रहे बथुआ गांव के पास रहने वाले गुरनाम सिंह के परिवार की आपबीती रोंगटे खड़े करने वाली है। उन्होंने बताया कि बीती रात तेंदुआ उनके घर में घुस आया और पालतू कुत्ते पर हमला कर दिया। शोर मचाने पर वह गन्ने के खेत की तरफ भाग गया। गुरनाम ने तेंदुए के पंजों के निशान भी दिखाए। उनकी पत्नी गुरप्रीत कौर ने बताया कि वो रातभर जागकर बच्चों की रखवाली करती रहीं। घर के ठीक बगल में गन्ने का खेत है, जहां से रातभर तेंदुए की आवाजें आती रहती हैं। डर की वजह से नींद भी नहीं आती। परिवार के लोग अब दिन में भी लाठी-डंडे लेकर बच्चों की निगरानी करते हैं। जानवरों पर भी तेंदुआ हमले कर रहा बलजीत कौर ने बताया कि रात में तेंदुआ उनके घर में घुसा और भैंस पर हमला कर दिया। शोर मचाने पर वह भागा। पति खेतों में चले जाते हैं और वे घर में अपनी बेटियों के साथ अकेली रहती हैं। इसलिए अब दिन में भी तेंदुए के घुस आने का डर लगा रहता है। खेतों की रखवाली मजबूरी, रोजी-रोटी का संकट खेत की रखवाली कर रहे किसान जय कुमार ने बताया कि जंगल के आसपास लगाई गई वायर फेंसिंग कई जगह से टूटी हुई है। इससे जंगली जानवर फसल बर्बाद कर रहे हैं। बाहर निकलने में बहुत डर लगता है, लेकिन हमारी मजबूरी है। पेट पालने और बच्चों का पेट भरने के लिए खेती ही एकमात्र सहारा है। अगर खेतों की रखवाली नहीं करेंगे, तो परिवार भुखमरी की कगार पर आ जाएगा। हाथी, बंदर और जंगली जानवर फसलों को पहले ही नुकसान पहुंचा रहे थे। अब तेंदुए की दहशत ने जिंदगी और रोजी-रोटी दोनों पर संकट खड़ा कर दिया है। अब बच्चे झुंड बनाकर जाते हैं स्कूल, रास्ते में करते हैं शोर हमें स्कूल से घर लौटते बच्चों के एक ग्रुप मिला। बच्चों ने बताया कि पहले अकेले भी चले आते थे, लेकिन अब तेंदुए के डर से ग्रुप में ही स्कूल आते-जाते हैं। रास्ते में हम लोग जोर-जोर से शोर मचाते हैं, जिससे अगर कोई जंगली जानवर आसपास छुपा हो तो वह दूर चला जाए। अगर स्कूल नहीं जाएंगे तो कोर्स छूट जाएगा। इसलिए जोखिम उठाना पड़ता है। 10 महीने में 17 तेंदुए पकड़े गए, फिर भी हमले जारी उत्तर निघासन वन रेंज में पिछले 10 महीनों के भीतर 17 तेंदुओं को पकड़ा गया है, जो प्रदेश में एक रिकॉर्ड है। भले ही कागजों पर ये बड़ी उपलब्धि हो, लेकिन गांव वाले संतुष्ट नहीं हैं। लोगों की मांग है कि हमले करने वाले तेंदुए को तुरंत पकड़ा जाए। हाथियों ने जो वायर फेंसिंग तोड़ी है, उसकी तत्काल मरम्मत हो। स्कूल के रास्तों और आबादी वाले क्षेत्रों में वन विभाग गश्त की व्यवस्था करे। कच्चे घरों के आसपास रोशनी और सोलर लाइट लगाई जाए। पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। रेंजर भूपेंद्र सिंह ने बताया… टॉपर फार्म में 2 पिंजरे और संवेदनशील जगहों पर 8 पिंजरे लगाए गए हैं। वन विभाग की टीम रात में गश्त कर रही है। लाउडस्पीकर से लोगों को अलर्ट रहने की चेतावनी दी जा रही है। जंगल के पास जेसीबी से सुरक्षा खाई खोदी जा रही है। मृतक बच्चे के परिजनों को 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें… पति को सांप से डसवाया, फांसी सुनते ही बेहोश हुई, जज ने फैसले में सती सावित्री, अर्धांगिनी का जिक्र किया
“अमित कश्यप की हत्या ने समाज में वैवाहिक जीवन की नींव को हिला दिया। जिस पत्नी रविता के हाथों पति अमित को रक्षा की उम्मीद थी, उसी ने पति की सांसें छीन लीं। यह पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते की निर्मम हत्या है। कलयुगी रविता ने सती सावित्री के आदर्शों को तार-तार किया।” ये बातें मेरठ के ADJ-12 जयवीर सिंह नागर ने अपने जजमेंट में लिखी हैं। रविता-अमरदीप दोनों को केवल आजीवन कारावास देना पर्याप्त नहीं होगा, इसलिए दोनों को मृत्युदंड दिया जाता है। पढ़ें पूरी खबर…
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