तीजन बाई से बिस्मिल्लाह खां तक के संघर्षों की कहानी:CMP कॉलेज में ‘कहानियां सुर ताल के साधकों की’ विषय पर हुआ व्याख्यान, डॉ. धनंजय चोपड़ा ने अपने अंदाज में सुनाए कलाकारों के किस्से
एक कलाकार का जीवन उतना सहज नहीं होता, जितनी सहजता से वह अपनी कला की प्रस्तुति करता है। तीजन बाई का पूरा जीवन संघर्षों में बीता। यह संघर्ष उनके जन्म के छह दिन बाद से शुरू हुआ और मृत्यु तक चलता रहा। इसके बावजूद उन्होंने अभावों का असर अपने स्वभाव पर नहीं पड़ने दिया। वह लड़ती रहीं और जीतती रहीं।” यह बात वरिष्ठ कथाकार और लेखक डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कही। वे स्पिक मैके और सीएमपी डिग्री कॉलेज के संगीत विभाग की ओर से आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे। कार्यक्रम का विषय ‘कहानियां सुर ताल के साधकों की’ था। डॉ. चोपड़ा ने अपनी कथा-कहने की शैली से मंच पर तीजन बाई के जीवन और संघर्षों को जीवंत कर दिया। तीजन बाई की पंडवानी से बिस्मिल्लाह खां की शहनाई तक के किस्से डॉ. चोपड़ा ने विद्यार्थियों को तीजन बाई के शुरुआती जीवन, पंडवानी गायन और संगीत साधना से जुड़े प्रसंग सुनाए। इसके बाद उन्होंने प्रख्यात शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के बचपन से लेकर 90 वर्ष की उम्र तक के कई किस्से साझा किए। इन प्रसंगों में रसूलन बाई और बतूलन बाई से जुड़े किस्से भी शामिल रहे। कार्यक्रम का सबसे रोचक प्रसंग आजाद भारत की पहली सुबह का रहा, जब उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने लाल किले से शहनाई बजाई थी। डॉ. चोपड़ा ने ठुमरी गायिका विदुषी गिरिजा देवी के जीवन और कला से जुड़े प्रसंग भी सुनाए। कलाकारों के साथ बिताए समय के अनुभव साझा किए इस अवसर पर वरिष्ठ संगीत विशेषज्ञ डॉ. मधुरानी शुक्ला ने कलाकारों के साथ बिताए समय के अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना से हुई। अतिथियों का स्वागत संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि गुप्ता ने किया, जबकि आभार ज्ञापन डॉ. निधि श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आकांक्षा पाल ने किया। कार्यक्रम में सीएमपी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अजय प्रकाश खरे, उप प्राचार्या प्रो. नीता सिन्हा और स्पिक मैके के सचिव श्रेयस शुक्ला सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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