उन्नाव में गंगा का जलस्तर 15 सेंटीमीटर घटा:3 महीने बाद चेतावनी बिंदु से नीचे आया पानी, बाढ़ प्रभावितों को राहत
उन्नाव में गंगा के जलस्तर में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार सुबह केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार जलस्तर घटकर 111.88 मीटर पर पहुंच गया। पिछले 24 घंटे में जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की कमी आई है। गंगा का जलस्तर अब चेतावनी बिंदु 112 मीटर से 12 सेंटीमीटर नीचे आ गया है। करीब तीन महीने बाद जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे पहुंचने से शुक्लागंज और आसपास के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने राहत की उम्मीद जताई है। हालांकि, निचले इलाकों में अब भी पानी भरा होने से जनजीवन पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद शुक्लागंज और आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी। कई बस्तियों में पानी घुसने से लोगों को घरों से निकलने और जरूरी कामकाज के लिए आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा था। अब जलस्तर में लगातार गिरावट आने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हालांकि, जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकलने में अभी समय लग सकता है। गंगा में उफान के चलते गोताखोर, कर्बला, हुसैन नगर, तेजीपुरवा और सैय्यद कंपाउंड समेत शुक्लागंज के कई तटीय इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया था। घरों के आसपास और रास्तों पर पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई थीं। संपर्क मार्गों पर जलभराव वहीं, शहर के रविदास नगर, मालवीय नगर, श्रीनगर और इंद्रानगर में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया था। कई संपर्क मार्गों पर जलभराव होने से लोगों को आवागमन के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। जलस्तर घटने के बावजूद निचले इलाकों में जमा पानी लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित परिवारों को पूरी राहत मिलने में अभी समय लगने की संभावना है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में भी जनजीवन प्रभावित हुआ था। गगनीखेड़ा और फत्तेखेड़ा समेत कई गांवों में दोबारा बाढ़ का पानी पहुंच गया था। गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर पानी भरने से ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नेतुआ स्थित कान्हा गौशाला में भी बाढ़ का पानी दोबारा प्रवेश कर गया था। वहीं, त्रिभुवनखेड़ा पावर हाउस के पास पानी पहुंचने से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। लोगों को सतर्क रहने की जरूरत फिलहाल जलस्तर में गिरावट से तटीय क्षेत्रों के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निचले इलाकों में जलभराव और संपर्क मार्गों पर पानी जमा होने के कारण लोगों की परेशानी बरकरार है। जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों और तटीय इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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