वाराणसी में बनेगा स्वामी विवेकानंद का भव्य स्मारक:20.69 करोड़ का बजट जारी, अर्दली बाजार के गोपाल लाल विला के बहुरेंगे दिन
वाराणसी में अब स्वामी विवेकानंद का भव्य स्मारक बनाया जाएगा। केंद्र सरकार का पर्यटन मंत्रालय अर्दली बाज़ार स्थित गोपाल लाल विला को स्मारक के रूप में डेवलेप करेगा। केंद्र सरकार ने 'स्वदेश दर्शन 2.0 योजना' के तहत काशी-सारनाथ हेरिटेज स्ट्रीटस्केप परियोजना को मंजूरी दी है। जिसमें सबसे प्रमुख घटक 'संध्यावास - इंटरप्रिटेशन सेंटर' (गोपाल लाल विला, अर्दली बाजार) के रूप में स्वामी विवेकानंद के स्मारक के लिए 20.69 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इस निर्णय पर विवेकानंद प्रवास संरक्षण समिति के संयोजक विनोद पांडेय 'भैया जी' एडवोकेट और गोपाल लाल विला के सेवक एसके घोष ने हर्ष जताया है और सरकार का धन्यवाद दिया है। बता दें की इस विला स्वामी विवेकानंद जी तीन बार अपनी काशी यात्रा के दौरान रुके और कहा जाता है कि शिकागो जाने की रूप रेखा यहीं बनाई और वापस भी शिकागो से यहीं आये। खंडहर गोपाल लाल विला के बहुरेंगे दिन
एसके घोष ने दैनिक भास्कर को बताया - अर्दली बाजार स्थित गोपाल लाल विला स्वामी विवेकानंद के काशी प्रवास का एक अत्यंत पावन और ऐतिहासिक केंद्र है। इस स्थल को एक भव्य स्मारक और व्याख्या केंद्र के रूप में विकसित करने की हमारी लंबे समय से चल रही मांग को भारत सरकार ने पूरा किया है। यह युवा संन्यासी के विचारों और सनातन संस्कृति की विरासत को बचाये रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। 20.69 करोड़ से होगा काम
केंद्र सरकार ने स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के लिए कुल 37.14 करोड़ का बजट काशी को दिया है। जिसमें सर्वाधिक स्वामी विवेकानंद स्मारक के लिए 20.69 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। गोपाल लाल विला में बनने वाला यह स्मारक स्वामी विवेकानंद की काशी यात्राओं, उनके आध्यात्मिक संदेशों और राष्ट्र-निर्माण के संकल्पों को जीवंत करेगा। युवाओं को मिलेगा स्वामी विवेकानंद को जनाने का मौका
एडवोकट विनोद पांडेय ने कहा स्वामी विवेकानंद के स्मारक के बनने के बाद इस इंटरप्रिटेशन सेंटर के माध्यम से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और युवाओं को स्वामी जी के जीवन और दर्शन को करीब से जानने का मौका मिलेगा। जिससे वाराणसी में सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाई मिलेगी। विवेकानंद प्रवास संरक्षण समिति इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समय सीमा के भीतर और पूरी भव्यता के साथ धरातल पर उतारने के लिए सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलकर चलेगी। अपने जीवन में तीन बार गोपाल लाल विला में ठहरे स्वामी विवेकानंद
एक अनजान व परिव्राजक संन्यासी के रुप में स्वामी विवेकानन्द जी ने 1887, 1890 और 1891 में वाराणसी की यात्रा की। 1891 में वाराणसी से विदा लेते समय उन्होंने कहा था, "मैं अब काशी छोड़ रहा हूं और तब तक वापस नहीं आऊंगा जब तक कि मैं समाज में एक बम की तरह धमाका न कर दूं; और समाज मेरी बातों का पूर्ण विश्वास के साथ अनुसरण ना कर ले।" इसके बाद वो शिकागो की यात्रा पर गए। वहां से लौटे तो दोबारा काशी 1902 में आये। यहां से वापस लौटने के बाद 4 जुलाई 1902 में उन्होंने अपना नश्वर शरीर त्याग दिया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)