वाराणसी में साइबर क्राइम के दो शतिर गिरफ्तार:विदेशी काल को भारतीय नम्बरों में करते थे एक्सचेंज, 6 SIM Box के साथ पकड़े गए
वाराणसी पुलिस की साइबर क्राइम सेल और शिवपुर, लंका और चितईपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने शहर के तीन अलग-अलग किराये के ठिकानों पर छापेमारी कर 6 सिम बॉक्स, वीपीएन गेटवे, राउटर और अन्य भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। यह गिरोह विदेश से आने वाली इंटरनेट कॉल्स को भारतीय मोबाइल नंबरों में बदलकर देश के नागरिकों को चूना लगा रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि एक अन्य आरोपी अभी फरार है। जिसकी तलाश जारी है। ऐसे हुआ गिरोह का पर्दाफाश
साइबर अपराध के नोडल अधिकारी अपर पुलिस आयुक्त नृपेंद्र ने बताया - साइबर क्राइम सेल की टीम को केंद्रीय पोर्टल पर लगातार कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों और म्यूल (फर्जी) खातों की जानकारी मिल रही थी। पुलिस ने जब इन संदिग्ध खातों की गहराई से जांच शुरू की, तो एक बैंक खाता सामने आया। इस अकेले खाते से देश के अलग-अलग राज्यों में हुई चार बड़ी साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी हुई थीं। इन्हीं शिकायतों में महाराष्ट्र के पुणे से जुड़ी डिजिटल अरेस्ट की एक बड़ी वारदात भी शामिल थी, जिसमें पीड़ित से 25 लाख रुपये की ठगी कर इसी खाते में ट्रांसफर करवाए गए थे। बैंक खाते की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस टीम वाराणसी के थाना चौक अंतर्गत सराय हरहा निवासी मोहम्मद आबिद (40) तक पहुंची। पुलिस ने जब आबिद को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने वाराणसी के तीन अलग-अलग रिहाइशी इलाकों में अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क स्थापित होने का सनसनीखेज खुलासा किया। तीन इलाकों में पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी
अपर पुलिस आयुक्त ने बताया - आरोपी से मिली सटीक जानकारी के आधार पर पुलिस की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर को वाराणसी के तीन ठिकानों -अशोकपुरम कॉलोनी (एकता नगर), बालाजी भवन (सामनेघाट) और कैलाशपुरी कॉलोनी में एक साथ छापेमारी की। इन तीनों ठिकानों को आरोपियों ने किराये पर ले रखा था और वहां अत्याधुनिक तकनीकी सेटअप लगाया हुआ था। सिम-ओवर-आईपी तकनीक से छिपाते थे पहचान पुलिस जांच में सामने आया कि बरामद किए गए सिम बॉक्स 'सिम-ओवर-आईपी' (Sim-over-IP) तकनीक पर काम कर रहे थे। इस तकनीक के जरिए इंटरनेट (वीओआईपी) के माध्यम से विदेश से आने वाली कॉल्स को वीपीएन गेटवे की मदद से भारतीय स्थानीय नंबरों में बदल दिया जाता था। जब यह गिरोह किसी भारतीय नागरिक को 'डिजिटल अरेस्ट' करने के लिए फोन करता था. तो पीड़ित के मोबाइल स्क्रीन पर भारतीय नंबर (जैसे +91 से शुरू होने वाले नंबर) ही दिखाई देता था। इससे आम लोग झांसे में आ जाते थे और उन्हें लगता था कि फोन किसी भारतीय जांच एजेंसी या पुलिस विभाग से आया है। इस तरह अपराधी अपनी वास्तविक विदेशी लोकेशन को पूरी तरह छिपा लेते थे। दो गिरफ्तार, एक वांछित और भारी उपकरण बरामद पुलिस ने इस मामले में जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान मोहम्मद आबिद निवासी सराय हरहा, वाराणसी और शशिशेखर सिंह निवासी नवापुरा, दारानगर, वाराणसी के रूप में हुई है। वहीं, गिरोह का एक अन्य साथी सौगात अस्थाना (निवासी लखनऊ) फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और उसे वांछित घोषित किया गया है। ये हुआ बरामद
पुलिस ने छापेमारी कर - 32-पोर्ट वाले 06 सिम बॉक्स (कुल 192 सिम स्लॉट और एंटीना), एक्साइटल कंपनी के 03 राउटर/गेटवे, टीपी-लिंक के 03 वायरलेस राउटर, 03 ओमाडा वीपीएन गेटवे, 03 वाई-फाई कैमरे और 04 मोबाइल फोन और एयरटेल के उपकरण, एक्सट्रीम फाइबर डिवाइस और 14 एडॉप्टर सहित अन्य नेटवर्किंग सामान बरामद किए हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वाराणसी के चितईपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न सुसंगत धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
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