वाराणसी में यूपी एपिकॉन सम्मेलन:मधुमेह, हृदय और रक्त रोगों के आधुनिक उपचार पर विशेषज्ञों ने किया मंथन
वाराणसी के रोहनिया स्थित गोखुल धाम बैंक्वेट हॉल में आयोजित 43वें वार्षिक सम्मेलन "यूपी एपिकॉन 2026" के पहले दिन इंटरनल मेडिसिन पर व्यापक शैक्षणिक और वैज्ञानिक सत्रों में प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अंबुज यादव की अध्यक्षता में दीप्तांशु वेदांत गुप्ता पुरस्कार के लिए पीजी क्विज से हुई। कार्डियोमेटाबोलिक सत्र में डॉ. शरद कुमार ने मधुमेह रोगियों द्वारा फल, चावल और आलू से परहेज करने की भ्रांतियों को दूर करते हुए पर्याप्त सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ संतुलित आहार की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. मधुर यादव ने दुर्लभ लिपिड विकारों के मूल्यांकन पर चर्चा की और कहा कि एएससीवीडी जोखिम से पहले अग्नाशयशोथ के जोखिम को संबोधित किया जाना चाहिए। डॉ. मधुकर मित्तल (एम्स रायबरेली) ने एडीए दिशानिर्देशों के अनुसार सेमाग्लूटाइड के अंग-सुरक्षात्मक और वजन प्रबंधन लाभों पर व्याख्यान दिया। डॉ. ज्योतिर्मय पाल ने हार्ट फेल्योर के अप्रोच पर चर्चा करते हुए सत्र का समापन किया और कहा कि कोई भी एक टेस्ट अकेले इसका निदान नहीं कर सकता। हेमेटोलॉजी सत्र में डॉ. कुंदन मिश्रा ने थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के नैदानिक मूल्यांकन पर चर्चा की और डेटा साझा करते हुए बताया कि कई मरीज बिना ट्रांसफ्यूजन के ही ठीक हो जाते हैं। डॉ. शैलेंद्र प्रसाद वर्मा (केजीएमयू, लखनऊ) ने हीमोफीलिया-ए के उपचार में हुई प्रगति पर बात की और कहा कि हेमलिब्रा का फैक्टर VIII से कोई संरचनात्मक संबंध नहीं है। उद्घाटन सत्र को बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने संबोधित किया, जिन्होंने कहा, "वह दिन दूर नहीं जब पश्चिम हमारी ओर देखेगा।" इस अवसर पर आईएमएस के निदेशक प्रो. सत्य नारायण शंखवार के साथ वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. जी. नरसिमुलु (राष्ट्रीय अध्यक्ष, एपीआई), प्रो. के.के. गुप्ता, प्रो. संजय टंडन, प्रो. संजय गुप्ता, प्रो. अतुल मेहरोत्रा, प्रो. रिचा गिरी, डॉ. ज्योतिर्मय पाल और प्रो. एल.पी. मीना उपस्थित रहे। इसके बाद स्पॉन्सर्ड सत्र में डॉ. अजय शुक्ला ने टाइप 2 डीएम प्रबंधन में इमेग्लिमिन की भूमिका पर व्याख्यान दिया। संक्रामक रोग सत्र में डॉ. नेहा गुप्ता ने मधुमेह में संक्रमण पर, डॉ. जॉर्ज एम. वर्गीज ने रिकेट्सियोसिस पर और डॉ. नंदनी चटर्जी ने यात्रा से जुड़ी बुखार की बीमारी पर चर्चा की।
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