नवी पिल्लई को बधाई नहीं देने पर सरकार से नाराज शशि थरूर
भारतीय मूल की नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने अब तक उन्हें बधाई क्यों नहीं दी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नवी पिल्लई को बधाई देने का आग्रह किया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 19 अक्टूबर 2026
भारतीय मूल की प्रख्यात न्यायविद नवानेथम ‘नवी’ पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद भारत में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के बावजूद सरकार की ओर से उन्हें बधाई क्यों नहीं दी गई। थरूर ने इस मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार के रुख की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि नवी पिल्लई की उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व होना चाहिए।
सरकार की चुप्पी पर शशि थरूर ने जताई नाराजगी
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सामाजिक माध्यम पर एक संदेश साझा करते हुए नवी पिल्लई को बधाई नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, भारतीय मूल की इस असाधारण महिला को नोबेल शांति पुरस्कार मिले छह दिन बीत चुके थे, लेकिन भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बधाई संदेश सामने नहीं आया था। थरूर ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई और सरकार के फैसले को निंदनीय बताया। उनका कहना है कि नवी पिल्लई की उपलब्धि का सम्मान किया जाना चाहिए।
नवी पिल्लई की उपलब्धि को लेकर सरकार पर सवाल
शशि थरूर ने अपने संदेश के साथ नवी पिल्लई के जीवन और उनके योगदान को दर्शाने वाला एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार वीडियो भी साझा किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नवी पिल्लई ने मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। ऐसे में उनकी उपलब्धि को केवल व्यक्तिगत सम्मान के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय मूल की एक महिला की वैश्विक सफलता के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। थरूर की टिप्पणी के बाद सरकार की ओर से बधाई संदेश नहीं आने का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में आ गया है।
डी. राजा ने भी प्रधानमंत्री से किया आग्रह
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नवी पिल्लई को बधाई देने का आग्रह किया है। उन्होंने एक समाचार माध्यम से बातचीत में कहा कि देश को इस उपलब्धि का उत्सव मनाना चाहिए। उनके रुख से स्पष्ट है कि इस मामले को लेकर विपक्ष के कुछ नेताओं ने सरकार से सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने की पुष्टि नहीं होती है।
शशि थरूर पहले ही दे चुके हैं बधाई
शशि थरूर ने भारत सरकार की आलोचना करने से पहले ही नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर बधाई दी थी। उन्होंने अपने संदेश में मानवाधिकारों की रक्षा, अंतरराष्ट्रीय न्याय को मजबूत करने और दुनिया भर में कानून के शासन को बढ़ावा देने के लिए उनके जीवनभर के समर्पण की सराहना की थी। थरूर ने कहा था कि उनका योगदान लोगों को प्रेरित करता रहेगा। संयुक्त राष्ट्र में सेवा दे चुके थरूर ने इस सम्मान को नवी पिल्लई के कार्यों के अनुरूप बताया था।
साधारण परिवार में हुआ था नवी पिल्लई का जन्म
नवी पिल्लई का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में हुआ था। वह तमिल भारतीय मूल के परिवार से संबंध रखती हैं और उनके पिता बस चालक थे। उनका बचपन ऐसे समय में बीता, जब दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की कठोर व्यवस्था लागू थी। सामाजिक और नस्लीय भेदभाव के माहौल में आगे बढ़ते हुए उन्होंने न्याय और मानवाधिकारों के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।
मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में योगदान
नवी पिल्लई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली प्रमुख हस्तियों में गिनी जाती हैं। वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त के पद पर भी रह चुकी हैं। इस भूमिका में मानवाधिकारों की रक्षा, भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने और अंतरराष्ट्रीय न्याय से जुड़े विषयों पर उनका काम महत्वपूर्ण रहा है। उनकी उपलब्धियों को लेकर हो रही चर्चा ने एक बार फिर मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके योगदान और भारत सरकार की प्रतिक्रिया को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।
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