स्वतंत्रता सेनानी के परिवार के नाम वोटर लिस्ट से कटे:इटावा में 6 सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से गायब, 3 महीने चक्कर काटने का आरोप
इटावा में मतदाता सूची से नाम हटने का मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के परिवार का आरोप है कि एसआईआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में छह सदस्यों के नाम नहीं मिले। परिवार का कहना है कि नाम दोबारा जुड़वाने के लिए तीन महीने तक बीएलओ और तहसील निर्वाचन कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। मामला सोशल मीडिया पर उठने के बाद सदर एसडीएम ने नाम अपडेट कराने का आश्वासन दिया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में विपक्षी दलों और छात्रों की ओर से मतदाता सूची से नाम काटने को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी विपक्ष ने वोट चोरी और मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इटावा के इस मामले में प्रशासन का कहना है कि एसआईआर के दौरान परिवार के सदस्यों के फॉर्म जमा नहीं हुए थे। तीन पीढ़ियों से राजनीति और आजादी की लड़ाई से जुड़ा परिवार स्वर्गीय कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया स्वतंत्रता सेनानी, तीन बार सांसद और लाल सेना के संस्थापक थे। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने इटावा के चंबल क्षेत्र के बीहड़ों में पांच हजार सशस्त्र लड़ाकों की सेना का नेतृत्व किया था। आजादी के बाद वह राजनीति में आए और 1957 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद 1962 और 1977 में भी सांसद चुने गए। उनकी पत्नी स्वर्गीय सरला भदौरिया इटावा की पहली महिला राज्यसभा सांसद थीं। वह उत्तर प्रदेश के महिला एवं बाल कल्याण विभाग की अध्यक्ष भी रहीं। उनके बड़े बेटे सुधीन्द्र भदौरिया बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। परिवार का कहना है कि करीब 150 साल से इटावा में रहने वाले उनके सदस्यों के नाम सूची से हटना चिंता का विषय है। एसआईआर के बाद छह सदस्यों के नाम नहीं मिले परिवार के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में रंजना भदौरिया, राहुल भदौरिया, स्मिता भदौरिया, सिद्धार्थ भदौरिया, सुषमा भदौरिया और बोम सिंह के नाम नहीं मिले। इसके बाद परिवार ने संबंधित बीएलओ और तहसील निर्वाचन कार्यालय से संपर्क कर नाम दोबारा जुड़वाने की कोशिश की। कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के पौत्र राघवेंद्र सिंह ने बताया कि वह पिछले तीन महीने से इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास कर रहे थे। उन्होंने फोन पर संपर्क करने के साथ ही अपने बूथ और तहसील निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर भी अधिकारियों से गुहार लगाई। उनका आरोप है कि कभी कागजात तो कभी समय की कमी बताकर उन्हें टाल दिया गया।
बीएलओ पर सुनवाई नहीं करने और साजिश का आरोप राघवेंद्र सिंह ने लड़ेती भवन के बीएलओ सौरभ और तहसील निर्वाचन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई बार संपर्क करने के बावजूद परिवार के सदस्यों के नाम दोबारा जुड़वाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। उन्होंने नाम हटाए जाने के पीछे साजिश की आशंका भी जताई है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले को बसपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीन्द्र भदौरिया ने भी सोशल मीडिया पर उठाया। उन्होंने परिवार के जरूरी दस्तावेजों और फॉर्म के साथ पोस्ट साझा कर निर्वाचन अधिकारियों से नाम जुड़वाने की अपील की। सुधीन्द्र ने कहा कि जिस परिवार ने देश की आजादी की लड़ाई में संघर्ष किया, उसे आज अपने मताधिकार के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची से क्यों हटाए गए। एसडीएम बोले- सोशल मीडिया से मिले फॉर्म, नाम होंगे अपडेट सदर एसडीएम मनोज पाठक ने बताया कि जानकारी मिली है कि एसआईआर के दौरान परिवार के सदस्यों के फॉर्म जमा नहीं हुए थे। परिवार के कुछ सदस्य लंबे समय से दिल्ली में रह रहे हैं। उनके मुताबिक, बीएलओ ने घर जाकर संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय परिवार का कोई सदस्य नहीं मिला। एसडीएम ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से परिवार के फॉर्म प्राप्त हुए हैं और सदस्यों के नाम मतदाता सूची में अपडेट कर दिए जाएंगे। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद परिवार को नाम दोबारा दर्ज होने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया कब पूरी होती है।
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