सत्ता परिवर्तन पर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, महुआ मोइत्रा का बड़ा बयान
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सत्ता परिवर्तन की मांग उठाई है। वहीं, राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष पर अराजकता फैलाने के आरोप लगाए हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026
केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सत्ता परिवर्तन को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है, जो अपने ही नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए कथित रूप से हिरासत में लेती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में सत्ता परिवर्तन की मांग की है। यह बयान चुनावी अनियमितताओं के आरोपों और विपक्षी प्रदर्शनों को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है।
महुआ मोइत्रा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सामाजिक माध्यम एक्स पर एक संदेश साझा करते हुए कहा कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले निहत्थे नागरिकों को कथित रूप से अवैध तरीके से हिरासत में लिया जाता है और उन्हें जेल भेजने के लिए पुलिस तंत्र का इस्तेमाल किया जाता है। महुआ ने कहा कि ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उनका यह बयान केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष के बढ़ते विरोध को दर्शाता है।
कपिल सिब्बल ने भी उठाए सरकार पर सवाल
महुआ मोइत्रा के बयान से पहले राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने भी सत्ता परिवर्तन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा था। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस आरोप पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें विपक्षी दलों पर बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने की बात कही गई थी। सिब्बल ने कहा कि सत्ता परिवर्तन की मांग केवल कांग्रेस की ओर से नहीं, बल्कि देश की जनता की ओर से भी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के खिलाफ जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाया अराजकता फैलाने का आरोप
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय राजधानी में कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन करना चाहता है और इसके लिए युवाओं का इस्तेमाल कर रहा है। लखनऊ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी को भी अराजकता फैलाने या संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने की अनुमति नहीं देता। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
कपिल सिब्बल ने भ्रष्टाचार और संस्थाओं को लेकर लगाए आरोप
राजनाथ सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया और संवैधानिक संस्थाओं पर अपना प्रभाव स्थापित किया। उन्होंने मतदाता सूची में कथित हेरफेर का मुद्दा भी उठाया। सिब्बल ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के नारों के बीच सत्ता में आई सरकार अब अपने वादों से पीछे हट गई है। उन्होंने इन आरोपों के आधार पर कहा कि अब सरकार के जाने का समय आ गया है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष को घेरा
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी सत्ता परिवर्तन से जुड़े बयानों को लेकर विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बयान के संदर्भ में विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए। नवीन ने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव सुधारों, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और युवाओं के भविष्य के बजाय किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करना चाहता है। हालांकि, ये आरोप भाजपा अध्यक्ष के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और विपक्ष की ओर से इन पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
विदेशी ताकतों से संबंध का भी लगाया आरोप
नितिन नवीन ने सामाजिक माध्यम एक्स पर अपने संदेश में आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों का इस्तेमाल देश को अस्थिर करने की कथित कोशिशों की ओर संकेत करता है। उन्होंने विपक्ष के कथित एजेंडे को विदेशी ताकतों से जोड़ते हुए उसे भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया। भाजपा अध्यक्ष ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस मामले को कथित रूप से नक्सली विचारधारा से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनता के जनादेश से होकर गुजरता है, न कि अराजकता के माध्यम से।
सत्ता परिवर्तन को लेकर क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद
सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर यह विवाद ऐसे समय तेज हुआ है, जब चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक दल आमने-सामने हैं। विपक्ष सरकार और चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश बता रही है। महुआ मोइत्रा और कपिल सिब्बल के बयानों ने इस बहस को नया राजनीतिक आयाम दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है।
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