10 बीघा जमीन, मुआवजे और मकान का विवाद:नोएडा में 5 लोगों की मौत से उठे सवाल, बिसरा प्रिजर्व, भाभी ने लगाया जहर खिलाने का आरोप

Oct 18, 2026 - 06:35
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10 बीघा जमीन, मुआवजे और मकान का विवाद:नोएडा में 5 लोगों की मौत से उठे सवाल, बिसरा प्रिजर्व, भाभी ने लगाया जहर खिलाने का आरोप
जिस संपत्ति को परिवार के भविष्य का सहारा बनना था, वही अब पांच लोगों की मौत के मामले में अहम सवाल बन गई है। नोएडा के रबूपुरा के नगला श्रीपदम गांव में महेश (37), पत्नी ललिता (35), बेटे लड्डू (11), साक्षत (3) और बेटी मिष्टी (7) की मौत के बाद पैतृक संपत्ति का विवाद सामने आया है। डीआईजी राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि शुरुआती जांच में फूड पॉइजनिंग का मामला लग रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ होगी। देर रात तक पांचों शवों का पोस्टमार्टम कर दिया गया है। पुलिस हर एंगल पर जांच कर रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, परिवार के पास करीब 10 बीघा जमीन थी। जमीन के अधिग्रहण पर वर्ष 2009 में यमुना प्राधिकरण से मुआवजा मिला था। इससे बिलासपुर और सिकंदरपुर में भी जमीन खरीदी। अब चर्चा है कि महेश की मां चंद्रावती ने जमीन और मकान अपनी तीन बेटियों के नाम कर दिए थे। इसे लेकर मां-बेटे के बीच अनबन की बात सामने आई है। 10 बीघा जमीन और मुआवजे को लेकर सवाल महेश के पिता किशनलाल रेलवे में कार्यरत थे। करीब 20 साल पहले वह पत्नी चंद्रावती के साथ दिल्ली के खेड़ाकला गांव से नगला पदम आकर रहने लगे थे। यहां किशनलाल ने चंद्रावती के नाम करीब 10 बीघा जमीन खरीदी थी। 2009 में जमीन के अधिग्रहण पर यमुना प्राधिकरण से मुआवजा मिला था। ग्रामीणों का दावा है कि मुआवजे की रकम किशनलाल ने अपनी तीनों बेटियों को दी थी। हालांकि, मुआवजे की कुल राशि और उसके वितरण की पुष्टि होना बाकी है। करीब तीन साल पहले किशनलाल की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद की चर्चा सामने आने लगी। 6 महीने पहले छोटी बेटी के नाम किया मकान ग्रामीणों के मुताबिक, करीब छह महीने पहले चंद्रावती ने गांव में स्थित पैतृक मकान छोटी बेटी के नाम कर दिया था। बताया जा रहा है कि महेश को इसकी जानकारी कुछ दिन पहले हुई थी। इसके बाद मां-बेटे के बीच तनाव बढ़ने की चर्चा है। महेश मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। ऐसे में जमीन और मकान को लेकर चल रहा विवाद परिवार के भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया था। हालांकि, मकान किस दस्तावेज के आधार पर छोटी बेटी के नाम किया गया और संपत्ति का वास्तविक बंटवारा कैसे हुआ, इसकी पुष्टि होना बाकी है। संपत्ति विवाद का मौतों से क्या संबंध? परिवार के पांच सदस्यों की मौत के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। क्या महेश को पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मिल रहा था? क्या जमीन और मकान के नामांतरण को लेकर परिवार में तनाव बढ़ा था? क्या संपत्ति विवाद का पांचों की मौत से कोई संबंध है? फिलहाल इन सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। मेले से लौटकर खाए नूडल्स, सुबह मिले शव शुक्रवार रात महेश अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रबूपुरा अनाज मंडी में चल रही रामलीला और काली के मेले में गया था। रात करीब 10 से 10:30 बजे परिवार घर लौटा। इसके बाद सभी ने मैगी खाई और सो गए। शनिवार सुबह करीब आठ बजे महेश के बड़े बेटे लड्डू का दोस्त उसे स्कूल जाने के लिए बुलाने पहुंचा। काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो घर में पांच लोगों की मौत का पता चला। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस इन 3 एंगल से मामले की जांच कर रही भाभी ने साजिश का आरोप लगाया, बिसरा प्रिजर्व महेश की भाभी नीरजा ने सास चंद्रावती, ननदों और ननदोई पर साजिश के तहत महेश, उसकी पत्नी और तीनों बच्चों को जहरीला पदार्थ खिलाने का आरोप लगाया है। ललिता के मायके पक्ष ने भी साजिश की आशंका जताई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने प्रथम दृष्टया खाने के बाद तबीयत बिगड़ने की आशंका जताई है। शवों के पोस्टमार्टम के साथ बिसरा भी प्रिजर्व किया गया है। मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बिसरा जांच और पुलिस की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगी।

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