16 फीट के रावण दहन से शुरू होगा महोत्सव:सुल्तानपुर में 130 दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित, 1959 में ठठेरी बाजार से शुरू हुई थी पूजा की परंपरा
सुल्तानपुर का ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव पश्चिम बंगाल के बाद देश में दूसरे स्थान पर है, ऐसा जानकारों का कहना है। मंगलवार विजयादशमी पर रावण दहन के बाद शहर में दुर्गा पूजा पर्व शुरू होगा, जो निरंतर पांच दिनों तक चलेगा। शहर के गभड़िया स्थित ओवर ब्रिज पर मंगलवार शाम 5-6 बजे के आसपास 16 फीट के रावण के पुतले को जलाया जाएगा। यहां राम की सेना भी पहुंचेगी। डीएम इंद्रजीत सिंह और एसपी विनीत जायसवाल यही से हरी झंडी दिखाकर मेले की शुरुआत करेंगे। शहर पूरी तरह से सजाया गया है। ख़ास तौर पर चौक, ठठेरी बाजार, अस्पताल रोड, जीएनरोड, विवेक नगर, राहुल चौराहा आदि स्थानों पर भव्यता देखने लायक है। इस बार शहर भर में 130 दुर्गा प्रतिमाएं लगाई गई हैं। बताते चलें कि वर्ष 1959 में बिहार से आए भिखारी लाल सोनी ने शहर के ठठेरी बाजार में साधारण तिरपाल के नीचे मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जो परंपरा शुरू की थी वह आज भव्य पंडालों और महोत्सव का रूप ले चुकी है। उनके चचेरे भाई पवन कुमार सोनी के मुताबिक, वर्ष 1959 में भिखारी लाल सोनी ने ठठेरी बाजार में पहली बार दुर्गा पूजा की प्रतिमा स्थापित कर इस परंपरा की नींव रखी थी। उस दौर में न आज जैसे भव्य पंडाल थे और न ही सजावट के आधुनिक साधन। तिरपाल और सामान्य सामग्री से छोटा-सा पंडाल तैयार कर मां दुर्गा की आराधना की जाती थी। भिखारी लाल सोनी की इस पहल को धीरे-धीरे लोगों का साथ मिलता गया। आस्था और उत्साह बढ़ा तो शहर के दूसरे मोहल्लों और बाजारों में भी दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होने लगीं। अलग-अलग पूजा समितियों ने पंडाल सजाने की परंपरा को आगे बढ़ाया। समय के साथ सजावट, प्रतिमाओं और पंडालों की भव्यता बढ़ती गई। यहां नवरात्रि से ही शहर की गलियां और बाजार भक्तिमय माहौल में रंग जाते हैं। आकर्षक सजावट और विविध रूपों में सजे पंडाल लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। आसपास के क्षेत्रों से भी लोग इन्हें देखने पहुंचते हैं। बता दें कि जिला प्रशासन ने केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के साथ बैठक कर महोत्सव की तैयारी पूरी कर ली है। यहां केंद्रीय दुर्गापूजा समिति के साथ-साथ नगर पालिका, खोया-पाया आदि जरुरी कैम्प भी खोले गए हैं। सुरक्षा के लिए पीएसी के साथ दूसरे जिलों से भी पुलिस बल बुलाया गया है।
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