1912 पर शिकायतों का अंबार, निस्तारण में देरी:96.36 लाख बिजली शिकायतें, 32.22 लाख का निस्तारण समय सीमा के बाद
यूपी में बिजली शिकायतों के लिए बनाए गए 1912 हेल्पलाइन सिस्टम में बड़ी संख्या में शिकायतों का समयसीमा के भीतर निस्तारण नहीं हो पा रहा है। 1 अप्रैल से 20 सितंबर 2026 तक 1912 पर 96 लाख 36 हजार 399 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 32 लाख 22 हजार 108 शिकायतों का निस्तारण तय समयसीमा के बाद हुआ। यानी कुल शिकायतों का करीब एक-तिहाई हिस्सा समयसीमा पार होने के बाद निस्तारित किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने इसके लिए बिजली विभाग की मौजूदा वर्टिकल व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिकायत दर्ज होने के बाद उसके कई स्तरों पर जाने से यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि देरी के लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने वर्टिकल व्यवस्था को खत्म कर सीधे जवाबदेही वाली शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने पर विचार करने की मांग की है। सबसे ज्यादा शिकायतें MVVNL में, 9.88 लाख देर से निस्तारित 1912 पर प्राप्त शिकायतों में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL) में सबसे ज्यादा 32,29,941 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 22,21,745 शिकायतों का निस्तारण समयसीमा में हुआ, जबकि 9,88,157 शिकायतें समयसीमा के बाद निस्तारित की गईं। पश्चिमांचल में 22.05 लाख शिकायतों में 13.61 लाख का ही समाधान समय सीमा के अंदर हुआ। दक्षिणांचल बिजली कंपनी को कुल 18.49 लाख शिकायतें मिली थीं। इसमें 14.40 लाख शिकायतों का समाधान ही कंपनी समय रहते कर पाई। पूर्वांचल में 16.56 लाख शिकायतों में 9.43 लाख तो केस्को को मिली 6.95 लाख शिकायतों में 3.68 लाख शिकायत ही समय सीमा में निराकरण किया जा सके। शिकायत दर्ज होने से समाधान तक कई स्तर अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि 1912 पर शिकायत दर्ज होने के बाद उसके समाधान की जिम्मेदारी कई स्तरों पर चली जाती है। ऐसे में उपभोक्ता के लिए यह पता करना मुश्किल होता है कि उसकी शिकायत किस अधिकारी के पास है और देरी होने पर जवाबदेही किसकी तय होगी। उन्होंने कहा कि शिकायत को समाधान तक पहुंचाने के बजाय यदि वह वर्टिकल व्यवस्था के कई स्तरों पर घूमती रहे तो उपभोक्ता को समय पर राहत नहीं मिल सकती। इसलिए शिकायत निस्तारण के पूरे सिस्टम की समीक्षा जरूरी है। समयसीमा पार होते ही हो ऑटो एस्केलेशन उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि 1912 को ऐसी व्यवस्था से जोड़ा जाए, जिसमें शिकायत दर्ज होते ही संबंधित जिम्मेदार अधिकारी तय हो जाए। शिकायत के समाधान की समयसीमा भी सिस्टम में स्वत: दर्ज हो और समयसीमा खत्म होते ही शिकायत उच्च अधिकारी के स्तर पर ऑटो एस्केलेट हो जाए। उनका कहना है कि इससे शिकायतों को एक स्तर से दूसरे स्तर पर भेजने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और देरी की स्थिति में जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी। 1912 सिर्फ शिकायत दर्ज करने का माध्यम न रहे वर्मा ने कहा कि 1912 को केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम नहीं, बल्कि समयबद्ध राहत और जवाबदेही वाली व्यवस्था बनाना होगा। जहां नियामकीय व्यवस्था में शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और देरी की स्थिति में उपभोक्ता को राहत या मुआवजे का प्रावधान है, वहां उसका प्रभावी अनुपालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा वर्टिकल मॉडल उपभोक्ताओं को समय पर राहत देने में बाधा बन रहा है तो इसे खत्म करने या पूरी तरह पुनर्गठित करने पर सरकार और बिजली कंपनियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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