22 सितंबर को जलझूलनी एकादशी:दशमी तिथि की शाम से शुरू हो जाता है एकादशी व्रत, भगवान गणेश, विष्णु जी और महालक्ष्मी का करें अभिषेक
कल (मंगलवार, 22 सितंबर) भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे जलझूलनी एकादशी और डोल ग्यारस कहते हैं। अभी गणेश उत्सव भी चल रहा है, इन दिनों में आने वाले इस एकादशी का महत्व काफी अधिक है, क्योंकि इस तिथि पर गणेश जी और भगवान विष्णु की पूजा एक साथ करने का विशेष योग बनता है। इस बार मंगलवार को यह तिथि होने से इस दिन मंगल देव की भी पूजा खासतौर पर करनी चाहिए। शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी व्रत करने से भक्तों को वही पुण्य फल प्राप्त होता है, जो बड़े-बड़े यज्ञों से मिलता है। एकादशी व्रत का मुख्य नियम अन्न का त्याग करना है। हालांकि, जो भक्त शारीरिक असमर्थता के कारण पूरे दिन निराहार रहने में सक्षम नहीं हैं, वे दिन में एक बार फलाहार कर सकते हैं, दूध और फलों का रस पी सकते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति किसी कारणवश व्रत रखने में पूरी तरह असमर्थ है, तो वह केवल भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करके भी पुण्य प्राप्त कर सकता है। अगर कोई भक्त विधिवत पूजा भी न कर पाए, तो भगवान विष्णु को केवल शुद्ध जल और तुलसी पत्र अर्पित चढ़ाकर ही पूरे व्रत के समान फल मिल सकता है। दशमी तिथि की शाम से शुरू होता है एकादशी व्रत
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