स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:चीजें कभी भी स्थायी आनंद नहीं दे सकतीं, क्योंकि हमारी इच्छाओं की कोई सीमा नहीं होती
हमारी इच्छाएं अनंत हैं। तारे और सागर की लहरें फिर भी गिनी जा सकती हैं, पर इच्छाओं की कोई सीमा नहीं होती। इसलिए अपनी कामनाओं पर नियंत्रण करना चाहिए। काल्पनिक इच्छाओं को छोड़कर यथार्थ में जीना जरूरी है। संग्रह, संचय, उच्च पद और प्रतिष्ठा जीवन के वास्तविक आधार नहीं, बल्कि केवल नश्वर खिलौने हैं। बाहरी चीजें कभी भी स्थायी आनंद या संतुष्टि नहीं दे सकतीं। सच्चा सुख बाहर खोजने के बजाय सत्संग के माध्यम से अपने भीतर देखना चाहिए। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए जीवन में आनंद पाने के लिए क्या करना चाहिए? आज का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर दिए गए फोटो पर क्लिक करें।
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