300 रुपए से जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया:अब सालाना 50-60 हजार की कमाई: स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं मलती, खेती और नर्सरी से भी आमदनी
बस्ती के कप्तानगंज ब्लॉक के महुआरी गांव की मलती देवी ने महज 300 रुपए से जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया था। आज वह इसी काम के साथ खेती और पौधों की नर्सरी तैयार कर सालाना 50 से 60 हजार रुपए तक कमा रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके काम को नई दिशा मिली और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में उनका योगदान बढ़ा। करीब 35 वर्षीय मलती देवी ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की है। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना। सीमित संसाधनों में महज 300 रुपए लगाकर जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया। इसके बाद वह संतोषी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें काम को आगे बढ़ाने का अवसर मिला और धीरे-धीरे यह उनकी आमदनी का जरिया बन गया। जैविक खेती के साथ नर्सरी से अतिरिक्त आय मलती देवी जैविक तरीके से गेहूं, धान, सरसों और मूंगफली की खेती भी करती हैं। इसके अलावा पौधों की नर्सरी तैयार करती हैं, जिससे उन्हें हर महीने करीब 9 हजार रुपए की अतिरिक्त आय हो रही है। जैविक खाद, खेती और नर्सरी को साथ लेकर उन्होंने आमदनी के कई स्रोत तैयार कर लिए हैं। तीन बच्चों की जिम्मेदारी भी संभाल रहीं परिवार में तीन बच्चों की जिम्मेदारी भी मलती देवी के कंधों पर है। बड़ी बेटी नैंसी प्रजापति कंप्यूटर से पॉलीटेक्निक की पढ़ाई कर रही हैं। दूसरी बेटी शीतल कक्षा 11 और बेटा दिव्यांश कक्षा 9 में पढ़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों के बीच मलती देवी लगातार मेहनत कर रही हैं। 300 रुपए से शुरू हुआ उनका छोटा सा प्रयास आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है।
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