37-साल से रावण बन रहे शिवशंकर बोले-आज घर-घर में रावण:वाराणसी में कहा- सीता हरण के समय माता को मन ही मन करते हैं प्रणाम

Oct 20, 2026 - 08:07
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37-साल से रावण बन रहे शिवशंकर बोले-आज घर-घर में रावण:वाराणसी में कहा- सीता हरण के समय माता को मन ही मन करते हैं प्रणाम
काशी की करीब 400 साल पुरानी रामलीला में शिवशंकर पिछले 36-37 साल से रावण का किरदार निभा रहे हैं। उनके पिता भी करीब 52 साल तक इसी भूमिका में रहे। शिवशंकर के लिए रावण बनना सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि पारिवारिक परंपरा और रामचरितमानस को समझने का जरिया है। वह कहते हैं कि रावण के पास शक्ति, वैभव और सामर्थ्य सब कुछ था, लेकिन गलत रास्ता चुनने के कारण उसका पतन हुआ। दैनिक भास्कर से बातचीत में शिवशंकर ने रावण के किरदार, सीता हरण के प्रसंग और रामचरितमानस के संदेश पर अपनी बात रखी। उनका कहना है कि आज के दौर में भी इंसान को अपने कर्मों और आचरण पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सीता हरण का मंचन करते समय वह माता सीता को मन ही मन प्रणाम करते हैं। दैनिक भास्कर से रावण का किरदार निभा रहे शिवशंकर ने की बातचीत, पढ़िए…. सवाल: कब से रावण बन रहे हैं? जवाब: मुझे रावण की भूमिका निभाते हुए करीब 36-37 साल हो गए हैं। मेरे पिता भी इसी रामलीला में रावण बनते थे। उन्होंने लगभग 52 साल तक यह किरदार निभाया। इस तरह यह हमारे परिवार की परंपरा है। गोस्वामी तुलसीदास जी की इस प्राचीन रामलीला में भूमिका निभाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। सवाल: रावण का ही किरदार क्यों चुना? जवाब: रामचरितमानस में राम और रावण दोनों प्रमुख पात्र हैं। रावण का चरित्र काफी व्यापक है। तुलसीदास जी ने लंका की भव्यता का वर्णन करते हुए उसे अमरावती से भी सुंदर बताया है। रावण के पास शक्ति, वैभव और सामर्थ्य सब कुछ था, लेकिन उसने गलत रास्ता चुना। इसलिए यह किरदार सिर्फ खलनायक का अभिनय नहीं, बल्कि जीवन के कई पहलुओं को समझने का माध्यम है। सवाल: रावण, विभीषण समेत सभी पात्रों को भगवान की लीला का हिस्सा मानते हैं? जवाब: भगवान की लीला को सामान्य मनुष्य की समझ से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। रामचरितमानस में भगवान की लीला और अलग-अलग पात्रों की भूमिका का वर्णन है। रावण हो, विभीषण हो या कोई दूसरा पात्र, सभी की अपनी भूमिका है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इंसान अपने कर्मों की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाए। उसे अपने विवेक से सही और गलत का चुनाव करना चाहिए। सवाल: सीता हरण का मंचन करते समय मन में क्या भाव आते हैं? जवाब: उस समय मेरे मन में सबसे पहले यही भाव आता है कि माता सीता जगत जननी हैं। मैं मन ही मन उन्हें प्रणाम करता हूं। यह हमारे लिए सिर्फ अभिनय का प्रसंग नहीं, बल्कि श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। रावण की भूमिका निभाते हुए भी हमारी आस्था बनी रहती है। सवाल: छाया सीता या माया सीता की मान्यता क्या है? जवाब: रामचरितमानस के अनुसार, भगवान राम ने राक्षसों के विनाश की लीला से पहले माता सीता को अग्नि में निवास करने के लिए कहा था। उनकी छाया रूपी प्रतिकृति को अपने पास रखा। इसी प्रसंग को छाया सीता या माया सीता के रूप में समझा जाता है। लक्ष्मण जी भी भगवान की इस लीला का रहस्य नहीं जान पाए थे। इससे पता चलता है कि भगवान की लीला के सभी रहस्यों को हर कोई नहीं समझ सकता। सवाल: आज के दौर में रावण के आचरण को कैसे देखते हैं? जवाब: किसी का हरण करना गलत है। रावण ने भी जब गलत रास्ता अपनाया, तो वही उसके पतन का कारण बना। किसी को अपनी शक्ति और सामर्थ्य का इस्तेमाल गलत काम के लिए नहीं करना चाहिए। रामलीला का संदेश यही है कि गलत कर्म का परिणाम अच्छा नहीं होता। त्रेतायुग की कथा को आज समझने का मतलब उसके संदेश को जीवन में उतारना है। सवाल: विभीषण ने रावण का साथ छोड़कर राम का पक्ष लिया। उन्हें कैसे देखते हैं? जवाब: मैं इसे भगवान की लीला के रूप में देखता हूं। विभीषण का अपना धर्म था और उन्होंने उसी के अनुसार फैसला लिया। किसी पात्र को सिर्फ एक नजरिये से देखना ठीक नहीं है। रामचरितमानस हमें कर्म का महत्व समझाता है। तुलसीदास जी ने लिखा है- ‘कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करइ सो तस फल चाखा।’ इंसान को अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। अच्छे कर्म का अच्छा और गलत कर्म का बुरा परिणाम होता है। सवाल: आज के समय में रावण को राजा बनना हो, तो वह क्या वादा करेगा? जवाब: आज के समय में तो घर-घर में रावण दिखाई देता है। अब रावण किसे कहा जाए, यह भी सोचने वाली बात है। शास्त्रों में बताए गए आदर्शों और आज के दौर की बातों में अंतर है। रामचरितमानस और धर्मग्रंथ सत्य, धर्म और कर्म का रास्ता दिखाते हैं। इंसान को अपने आचरण पर गौर करना चाहिए। केवल वादे करने से कोई आदर्श राजा नहीं बन जाता। सवाल: आज के समाज के लिए रामचरितमानस का सबसे बड़ा संदेश क्या है? जवाब: इंसान को अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए। रामचरितमानस में सुमति और कुमति, दोनों की चर्चा है। हर व्यक्ति के सामने सही और गलत के बीच चुनाव करने का मौका आता है। भगवान ने मनुष्य को बुद्धि दी है, इसलिए उसे अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए। रामचरितमानस की चौपाइयां सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए हैं। सवाल: अयोध्या में राम मंदिर बन गया है। क्या दर्शन करने गए हैं? जवाब: अभी तक अयोध्या जाकर दर्शन नहीं कर पाया हूं। हम काशी में रहकर भगवान की सेवा और आराधना करते हैं। यहां की रामलीला और धार्मिक परंपराएं हमारे जीवन का हिस्सा हैं।

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