40 देशों के डाक टिकटों में दिखी इतिहास-संस्कृति की झलक:संभल के मदरसे में विश्व डाक दिवस पर लगी प्रदर्शनी
संभल में विश्व डाक दिवस पर शुक्रवार को मोहल्ला दीपा सराय स्थित मदरसा इस्लामिया आजाद मुनव्वर उल कुरान में डाक टिकट संग्रह प्रदर्शनी लगाई गई। दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक चली प्रदर्शनी में 30 से 40 देशों के ऐतिहासिक डाक टिकट प्रदर्शित किए गए। इनके जरिए विद्यार्थियों को देश-दुनिया के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी दी गई। डाक टिकटों में छिपी है देश की पहचान मदरसे के प्रबंधक मोहम्मद अब्दुल्लाह ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि डाक टिकट कागज का छोटा-सा टुकड़ा जरूर है, लेकिन इसमें किसी देश की संस्कृति, रीति-रिवाज, महान व्यक्तित्व और विकास यात्रा की झलक मिलती है। इन पर राष्ट्रीय प्रतीकों, पशु-पक्षियों, ऐतिहासिक स्थलों और महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाया जाता है। इसलिए डाक टिकट इतिहास को जानने और समझने का अनूठा माध्यम हैं। 1840 में जारी हुआ था पहला डाक टिकट मोहम्मद अब्दुल्लाह ने बताया कि दुनिया का पहला डाक टिकट 'पेनी ब्लैक' 1 मई 1840 को ग्रेट ब्रिटेन में जारी हुआ था। इस पर महारानी विक्टोरिया की तस्वीर थी। इसके बाद विभिन्न देशों ने अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले डाक टिकट जारी किए। गांधी, नेहरू और आंबेडकर के टिकट आकर्षण का केंद्र प्रदर्शनी में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, मदर टेरेसा और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे महापुरुषों और प्रमुख व्यक्तित्वों पर जारी डाक टिकट प्रदर्शित किए गए। रामायण, महाभारत, योग, स्वतंत्रता आंदोलन, सांची स्तूप और सोमनाथ मंदिर से जुड़े टिकट भी रखे गए। इसके अलावा भारतीय फैशन, यातायात के साधनों, ओलंपिक खेलों, बाल दिवस और स्वच्छ भारत अभियान से संबंधित डाक टिकटों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। विद्यार्थियों में संग्रह के प्रति रुचि बढ़ाना उद्देश्य प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों में ऐतिहासिक जानकारी बढ़ाने, डाक टिकट संग्रह के प्रति रुचि पैदा करने और देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा। कार्यक्रम में जैनब उजमा, फरहा नाज, कबीर, रहीम, अबूजर, नासिर नजमी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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